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गलवान में झड़प के बाद चीन ने की बातचीत की पेशकश, LAC पर होगी लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक


गलवान घाटी में भारत और चीन सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से तनाव बढ़ गया है.

India-China Faceoff : भारत (India) और चीन (China) के सैन्य अधिकारियों की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब रविवार को जल, थल और वायु सेना के प्रमुखों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की ओर से किसी भी हालात से निपटने की खुली छूट दे दी गई है.

नई​ दिल्ली. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley Face off) में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प (India-China Dispute) के बाद आज एक बार फिर दोनों देशों के सैन्य अधिकारी बैठक करेंगे. बैठक में दोनों देश के अधिकारी सीमा पर चल रहे तनाव को कम करने के साथ ही गलवान घाटी में हुई घटना पर चर्चा करेंगे. गौरतलब है कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब रविवार को जल, थल और वायु सेना के प्रमुखों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से किसी भी हालात से निपटने की खुली छूट दे दी गई है.

जानकारी के मुताबिक भारत और चीन के बीच मौजूदा सीमा पर तनाव और विवाद को सुलझाने के लिए आज एक बार फिर सैन्य अधिकारियों की बैठक होने वाली है. इस बैठक की पेशकश इस बार ​चीन की तरफ से की गई है. बताया जाता है कि ये बैठक इस बार चीन की तरफ मोल्डो में की जाएगी. बैठक में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी सीमा पर बढ़ रहे तनाव को दूर करने पर बात करेंगे. इसी के साथ गलवान घाटी में पिछले दिनों हुई घटना पर भी चर्चा की जाएगी. 6 जून के बाद ये दूसरी बार है जब दोनों देशों के बीच सैन्य अधिका​री स्तर की बातचीत हो रही है.

वहीं दूसरी तरफ गृह मंत्रालय में भी भारत और चीन बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर आज बड़ी बैठक हो रही है. बता दें कि बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर एक सप्ताह में ये दूसरी अहम बैठक है. बॉर्डर मैनेजमेंट की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO), ITBP, CPWD और गृह मंत्रालय के अधिकारी मौजूद हैं. बैठक में सीमा पर जल्द सड़क निर्माण के काम को पूरा करने की रणनीति पर चर्चा की जा रही है. बता दें कि आईसीबीआर फेज़-2 यानी इंडो चाइना बार्डर रोड पर दूसरे चरण के काम में 32 सड़कों का निर्माण होना है. गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इन सड़कों के निर्माण कार्य को सारी एजेंसियों के सहयोग से और ज्यादा गति दी जाएगी.

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सूत्रों ने कहा कि गलवान घाटी की घटना के बाद भारतीय सैनिक टकराव की हालत में अग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी समय से चली आ रही परंपरा को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे. सशस्त्र बलों को चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है. सीमा प्रबंधन पर 1996 और 2005 में हुए दो समझौतों के अनुरूप दोनों देशों की सेनाओं ने टकराव की स्थिति में आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल न करने का पारस्परिक निर्णय किया था.


First published: June 22, 2020, 11:55 AM IST





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