Home Health & Fitness गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से होने वाली एलर्जी और लैक्टोज...

गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से होने वाली एलर्जी और लैक्टोज इनटॉलेरेंस के बीच क्या है अंतर, आज ही जान लें ये बात


एलर्जिक रिऐक्शन (Allergic Reaction) के लक्षण कई बार बेहद हल्के तो कई बार गंभीर भी हो सकते हैं. खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी को पारंपरिक रूप से हमारे शरीर की नकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जो विशेष कर दूध, मूंगफली, मछली, अंडा, गेहूं, सोया और बीज जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रोटीन (Protein) के प्रति होती है. ये सभी खाद्य पदार्थ हमारे किचन में मौजूद रहने वाली कॉमन चीजें हैं लिहाजा इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं अगर इन खाद्य पदार्थों से किसी को एलर्जी (Allergy) हो जाए.

इन खाद्य पदार्थों में से कई ऐसे हैं जिन्हें छह महीने की उम्र में नवजात शिशु को पूरक आहार (खाद्य और तरल पदार्थ जिन्हें ब्रेस्टमिल्क के पर्याप्त मात्रा में न मिलने पर शुरू किया जाता है) के रूप में दिया जाता है. ऐसे में इन खाद्य पदार्थों को शुरू करने के कुछ दिनों के अंदर ही नवजात शिशु में फूड एलर्जी देखने को मिल सकती है. हमारे समाज में बच्चे के 6 महीने का होते ही उसे गाय का दूध देने की भी परंपरा है. ऐसे में अगर आपके नवजात शिशु को गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी है तो आपको उसी वक्त उसके लक्षण नजर आने लगेंगे.

नवजात शिशु और छोटे बच्चों को जितनी भी तरह की एलर्जी होती है उसमें से गाय के दूध की प्रोटीन एलर्जी (सीएमपीए) सबसे कॉमन है और इसका प्रभाव आमतौर पर 0 से 3 साल तक के बच्चों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. गाय के दूध की प्रोटीन एलर्जी यानी सीएमपीए की परिभाषा की बात करें तो इसमें गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन को हमारा शरीर पचाने में सक्षम नहीं होता है. गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन को हमारा शरीर खतरनाक मानते हुए उसके खिलाफ प्रतिकूल प्रतिक्रिया देने लगता है और तभी लक्षणों की शुरुआत भी देखने को मिलती है.

गाय के दूध से होने वाली यह एलर्जी उन नवजात शिशुओं को भी हो सकती है जो सिर्फ मां का दूध ही पीते हैं. ऐसे बच्चों को एलर्जी इसलिए हो सकती है क्योंकि उनके मां के आहार में गाय के दूध और दूध से बने उत्पादों जैसे पनीर का अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है. भारत में करीब 3 से 5 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिन्हें गाय के दूध से होने वाली एलर्जी का सामना करना पड़ता है.गाय के दूध के प्रोटीन से होने वाली एलर्जी की पहचान कैसे करें?

गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से अगर किसी को एलर्जी हो तो उसमें कई लक्षण नजर आने लगते हैं जैसे: त्वचा पर चकत्ते या पित्ती,होंठ, मुंह या आंखों के आसपास के हिस्से में सूजन
जी मिचलाना या उल्टी आना
पेट में दर्द
डायरिया

शिशु का लगातार रोना और चुप न होना

ऐसा जरूरी नहीं कि दूध का सेवन करने के तुरंत बाद शरीर में प्रतिक्रिया दिखने लगेगी. हो सकता है कि एलर्जी से जुड़े लक्षणों को पूरी तीव्रता के साथ दिखने में कुछ देर भी हो जाए.

गाय के दूध की प्रोटीन की एलर्जी और लैक्टोज इनटॉलेरेंस में क्या अंतर है?

गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से होने वाली एलर्जी और लैक्टोज इनटॉलेरेंस- इन दोनों ही बीमारियों के ऐसे कई लक्षण हैं जो एक जैसे होते हैं. दोनों बीमारियों में काफी समानता होने की वजह से बीमारी को डायग्नोज करने में अक्सर देरी हो जाती है. माता-पिता सोचते हैं कि वे लैक्टोज इनटॉलेरेंस से डील कर रहे हैं लेकिन असल में वह सीएमपीए यानी काउ मिल्क प्रोटीन एलर्जी होती है जो पूरी तरह से एक अलग स्थिति है.

सीएमपीए और लैक्टोज इनटॉलेरेंस के बीच का अंतर इस बात पर निर्भर करता है इसकी प्रतिक्रिया किन वजहों से होती है. सीएमपीए यानी गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन की वजह से होने वाली एलर्जी में हमारा इम्यून सिस्टम गाय के दूध में मौजूद एक या एक से ज्यादा प्रोटीन के खिलाफ अनावश्यक और अत्यधिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है. जबकि लैक्टोज इनटॉलेरेंस हमारे शरीर की प्रतिक्रिया है लैक्टोज के खिलाफ जो कि कुछ और नहीं बल्कि दूध में मौजूद शुगर है. आसान शब्दों में समझें तो एलर्जी का संबंध प्रोटीन से है और इनटॉलेरेंस में शुगर शामिल होती है.

गाय के दूध से होने वाली एलर्जी नवजात शिशु और पैरेंट्स के जीवन को कैसे प्रभावित करती है?

एलर्जी के लक्षणों की वजह से अपने नवजात शिशु को दर्द के कारण रोते हुए देखना किसी भी माता-पिता के लिए सबसे तकलीफदेह स्थिति होती है. अगर पैरंट्स वर्किंग हों तो बच्चे की तकलीफ की वजह से माता-पिता की भी नींद खराब होती है, काम के घंटों का नुकसान होता है और पूरा परिवार भावनात्मक रूप से प्रभावित होने लगता है. इसलिए, लक्षणों की जागरूकता पर नियंत्रण पाने और जल्द से जल्द चिकित्सा सलाह लेने के लिए यह महत्वपूर्ण है.

गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से होने वाली एलर्जी को डायग्नोज करने और उसके इलाज के लिए कई तरह का समाधान मौजूद है. इलाज के पहले फेज में बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली मां की डायट से गाय के दूध और दूध से बने सभी उत्पादों को पूरी तरह से हटा दिया जाता है और पूरक भोजन में से भी दूध और ऐसे कई खाद्य पदार्थों को हटाया जाता है जिन्हें खाने से बच्चे को किसी भी तरह की एलर्जी होने का खतरा रहता है. गाय के दूध में मौजूद पोषण के स्त्रोत को हटाने के बाद उसकी भरपाई करने के लिए दूसरे स्त्रोतों से बच्चे को पोषण मुहैया कराना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे के विकास में किसी तरह की रुकावट न आए.

इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए डॉ प्रशांत बचीना ने लिखा है जो रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में कंसल्टेंट पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएन्ट्रोलॉजिस्ट, हेपटोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट फिजिशियन हैं. अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, दूध के फायदे और नुकसान पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं

 

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

RCB vs SRH, IPL 2020 Live Score: देवदत्‍त पडीकल्‍ल की डेब्यू मैच में शानदार बल्लेबाजी, आरसीबी की तेज शुरुआत

IPL 2020, Royal Challengers Bangalore vs Sunrisers Hyderabad Live Score: देवदत्त पडीकल्ल ने आरसीबी को दिलाई तेज शुरुआत Source link

PHOTOS: सैलानियों के आने से खुश हुआ हिमाचल, कुल्लू मनाली में लौटी रौनक

मुम्बई से कुल्लू मनाली घूमने आए अमित ने बताया कि पिछले 6 माह से वर्क फ्रॉम होम चल रहा है, ऐसे में कहीं भी घूमने-फिरने...

Recent Comments