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जम्मू-कश्मीर: घाटी में आतंकियों को हथियार और ड्रग्स बेच रहा है ये रैकेट, NIA ने किया भंडाफोड़


श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकियों (Terrorist) को हथियार मुहैया कराने वाले एक रैकेट का पता चला है. यह रैकेट, जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स बेचने का काम भी करता है. NIA की जांच में इस रैकेट के बारे में कई जानकारियों का खुलासा हुआ है. इसके बारे में यह भी बताया जा रहा है कि यह पाकिस्तानी महिला स्लीपर सेल (Women sleeper cell) का एक बड़ा नेटवर्क है. ये महिलाएं ISI के लिए काम कर रही हैं. ये महिलाएं, आतंकियों और ISI के बीच संपर्क सूत्र का काम करती हैं. ये महिलाएं ड्रग्स (Drugs) के कारोबार से आए पैसों को आतंकियों तक पहुंचाने का काम भी कर रही हैं.

आतंकियों (Terrorist) से रिश्ते रखने और घाटी में ऑपरेट करने वाले जैश, लश्कर, हिज़्ब जैसे करीब सभी आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक्स (Logistics) मुहैया कराने के आरोपी पूर्व सरपंच तारिक अहमद मीर और उसके नेटवर्क के बारे में जांच के दौरान NIA के हाथ कई सनसनीखेज जानकारियां लगी हैं. तारिक़ अहमद मीर को आतंकी संगठनों की लाइफ लाइन के तौर पर जाना जाता है. सूत्रों के मुताबिक जांच में NIA को पता चला कि तारिक़ अहमद मीर आतंकियों को हथियार बेचने और ड्रग्स की स्मगलिंग में भी शामिल है. वो आतंकियों को अलग-अलग रेट पर Ak-47 और दूसरे हथियार बेचता था.

किस तरह इन अपराधों को अंजाम देता था तारिक का नेटवर्क
एक शख्स जो पुलिस का सहयोगी था, वह तारिक़ की मदद करता था. उसी के जरिये वो नॉर्थ से साउथ कश्मीर आतंकियों को हथियार पहुंचाता था.तारिक़ पुलिस के अपने इस सहयोगी के हथियार को उसके घर पर ही छुड़वा देता था और जिस हथियार को आतंकियों तक पहुंचाना होता था, उसको उस सहयोगी को दे देता था. उसके पास हथियार देखकर किसी को शक नही होता था और हथियार आसानी से आतंकियों तक पहुंच जाता था.

पूरी घाटी में बिछा हुआ है महिला स्लीपर सेल का जाल
NIA को पड़ताल में ये भी पता चला कि पूरी घाटी में पाकिस्तानी महिला स्लीपर सेल का जाल बिछा हुआ है. बड़ी संख्या में पाकिस्तान की महिलाएं घाटी में हैं जो ISI के लिए काम कर रही हैं. ये महिलाएं, आतंकियों और पाकिस्तान के बीच संपर्क सूत्र का काम करती हैं. तारिक़ के पाकिस्तानी महिलाओं के इस नेटवर्क से काफी अच्छे ताल्लुकात हैं.

तारिक़ का एक अपना गैंग है, जिसमे उरी की रहने वाली हलीमा, कनिस्पोरा, बारामूला की रहने वाली पूर्व आतंकी शाहीन और उरी के रहने वाले कई लोग शामिल है. ये लोग सरहद पार से ड्रग्स रिसीव करती हैं. ड्रग्स के सप्लायर तारिक़ की पत्नी के रिश्तेदार थे. तारिक़ की पत्नी पाकिस्तानी है. ड्रग्स तारिक़ और हलीमा को सौंप दिया जाता था. तारिक़ और हलीमा इस ड्रग्स को दूसरे राज्यों में भेज देते थे.

दोनों के पास एक पुलिस का सहयोगी होने के चलते नहीं होती थी कार की जांच
उनकी कार को चेक नहीं किया जाता था, वजह दोनों के ही पास पुलिस का एक सहयोगी था. ड्रग्स के कारोबार के जरिये आने वाले पैसे का 70 फीसदी साउथ कश्मीर में पूर्व आतंकी शाहीन के जरिए आतंकियों को पहुंचाया जाता था और बाकी का पैसा ये पूरा गैंग आपस में बांट लेता था.

सूत्रों के मुताबिक पूर्व DSP जावेद इस पूरे गैंग की इस काम में मदद करता था. हंदवाड़ा और कश्मीर घाटी के दूसरे इलाकों में इस गैंग का नेटवर्क है. शुरूआत में तारिक़ बारामूला के ख्वाजाबाग इलाके में हलीमा बेगम, वाईस प्रेसिडेंट, महिला मोर्चा के नाम से अलॉट हुए सरकारी क्वॉर्टर में रहता था.

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PoK की रहने वाली है तारिक की दूसरी बीवी, नेपाल के रास्ते आई कश्मीर
बाद में उसने 40-45 लाख का एक घर सिनाद, बारामुला में खरीद लिया. इस दौरान हलीमा, तारिक़ से अवैध रिश्ते की वजह से लगातार संपर्क में थी. तारिक़ की दूसरी बीवी शरीना बेगम जो कि PoK की हैं, सोपोर के रहने वाले आतंकी मुश्ताक लतराम से शादी करके नेपाल के रास्ते कश्मीर आई.

उससे तलाक़ लेने के बाद उसने तारिक़ से शादी की. इस पूरे मामले में NIA की जांच के कुछ ऐसे पहलू हैं जिन्हें NIA ने देश हित में और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होने के नाते सार्वजनिक नहीं किया है.





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