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मद्रास HC ने दलित दामाद की हत्या के लिए फांसी पा चुके शख्स को किया बरी, फैसले पर बेटी हैरान


(पूर्णिमा मुरली)

नई दिल्ली. तमिलनाडु (Tamil Nadu) के तिरुपुर जिले में 2016 में सरेआम की गई एक 22 वर्षीय व्यक्ति की हत्या के मामले में मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने सोमवार को मुख्य आरोपी को बरी कर दिया और पांच अन्य दोषियों की मौत की सजा (Death Penalty) में भी बदलाव कर दिए. निचली अदालत (Lower Court) में दोषी ठहराए जाने और मामले के सभी ग्यारह आरोपियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद हाईकोर्ट का यह आदेश ढाई साल से अधिक समय के बाद आया है.

अपील पर आदेश सुनाते हुए न्यायमूर्ति एम. सत्यनारायणन और एम. निर्मल कुमार की खंडपीठ (division bench) ने कौसल्या (जिनके पति शंकर को उडुमलापेट शहर में उनके सामने मौत के घाट उतार दिया गया था) के पिता बी चिन्नास्वामी को बरी (acquitted) कर दिया और उन्हें आपराधिक साजिश (criminal conspiracy) सहित सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया.

बेटी ने फैसले पर कहा- मैं चकित और निराशपत्रकारों से बात करते हुए, कौसल्या ने कहा कि फैसले ने उन्हें हैरान और निराश दोनों ही किया है. उन्होंने मामले में फैसले को लेकर अपनी सोच के बारे में भी बताया. “पहले, अन्नालक्ष्मी को मुक्त किया गया. अब, चिन्नास्वामी की सजा को बदला गया. वहीं दूसरों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया. अन्नलक्ष्मी के मामले में फैसले के खिलाफ अपील को भी दरकिनार कर दिया गया है…”

उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले के समय पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि यह फैसला तब आया है, जब देश सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से जूझ रहा है.

अदालत ने उन सभी को रिहा करने को कहा, जो किसी अन्य मामले में बंद नहीं
उच्च न्यायालय ने कौशल्या की मां और दो अन्य को बरी करने पर भी मुहर लगाई. अदालत ने इस मामले से जुड़े उन सभी को भी रिहा करने का आदेश दिया, जो वर्तमान में किसी अन्य मामले के संबंध में हिरासत में नहीं है लेकिन वे वर्तमान में कैद में हैं.

12 दिसंबर, 2017 को तिरुपुर जिला सत्र अदालत ने चिन्नास्वामी सहित छह लोगों को हत्या के अपराध में मौत की सजा सुनाई थी. अन्य आरोपियों को भी जेल की अलग-अलग सजा दिए जाने के बाद मृत्युदंड का आदेश दिया गया था.

वकील ने कहा- चिन्नास्वामी ने ही हत्या के लिए भड़काया, नहीं हो सका साबित
News18 से बात करते हुए, एक वकील जो चिन्नास्वामी के लिए उपस्थित हुए थे, उन्होंने कहा “जिन हमलावरों ने अपराध को अंजाम दिया, उन्हें (चिन्नास्वामी) की ओर से भड़काया गया था या इसके लिए उन्होंने साजिश की थी, इस तथ्य को पूरी तरह से स्थापित नहीं किया जा सका है.” वकील के अनुसार, ट्रायल कोर्ट में भी मां (अन्नालक्ष्मी) की भूमिका स्वीकार नहीं की गई थी. अब, मद्रास उच्च न्यायालय में, पिता की भूमिका अदालत में साबित नहीं की जा सकी. ऐसे में “किसी की तरफ से भी भड़काया गया हो सकता है… इसलिए साजिश की थियरी टूट गई.”

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ये है पूरा मामला
शंकर उदुमलपेट के पास का रहता था और दलित जाति का था. वह गैर दलित लड़की कौशल्या से प्यार करता था. वे दोनों पोल्लची के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज (Private Engineering College) में साथ पढ़ाई करते थे. उन्होंने कौशल्या के माता-पिता की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली, इसके बाद लड़की के परिवार ने शंकर की हत्या करने के लिए साजिश रची. शंकर की 13 मार्च 2016 को तीन सदस्यीय गिरोह ने हत्या कर दी. हमले में कौशल्या को भी चोटें आईं थीं.





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