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मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल सेंटर बुरहानपुर के बुनकरों ने चीन से की तौबा, पढ़िए पूरी स्टोरी


बुरहानपुर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा पावरलूम सेंटर है. यहां 50 हजार पावरलूम (Powerloom) हैं, जिस पर बुनकर रोजाना 40 लाख मीटर कपड़ा तैयार करते हैं.

बुरहानपुर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा पावरलूम सेंटर है. यहां 50 हजार पावरलूम (Powerloom) हैं, जिस पर बुनकर रोजाना 40 लाख मीटर कपड़ा तैयार करते हैं.

बुरहानपुर. कोरोना महामारी (Coronavirus) के दौरान ढाई महीने के लॉकडाउन और सीमा पर चीन की हरकतों से नाराज़ बुरहानपुर के टेक्सटाइल व्यवसायी और बुनकरों ने चीन से तौबा कर ली है. ये लोग अब चीनी पावरलूम और मशीनरी (Chinese Goods) का इस्तेमाल अपने व्यवसाय में नहीं करेंगे. इन व्यवसाइयों ने कपड़ा बनाने के लिए उपयोग में आने वाला धागा खरीदना पहले ही बंद कर दिया था. अब चीनी पावरलूम और मशीनरी नहीं खरीदने का फैसला किया है. ये व्यवसायी अब स्वदेशी पावरलूम और मशीनरी खरीदेंगे. इन लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान या लोकल को वोकल बनाने के मिशन में भागीदार बनने का फैसला किया है.

बुरहानपुर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा पावरलूम सेंटर है. यहां का सूती कपड़ा उद्योग प्रसिद्ध है. यहां 50 हजार पावरलूम हैं, जिस पर बुनकर रोजाना 40 लाख मीटर कपड़ा तैयार करते हैं. यह कपड़ा पूरे देश के साथ विदेशों में भी निर्यात होता है. इन पावरलूम पर करीब 70 हजार बुनकर और मजदूर अपना रोजगार हासिल करते हैं. वहीं करीब 2 लाख की आबादी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इसी पावरलूम उद्योग से जुड़ी है. यानी यह कह सकते हैं कि पावरलूम उद्योग बुरहानपुर की रीढ़ की हड्डी है.

लोकल से वोकलकोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण इस उद्योग की कमर ही टूट गई. लॉकडाउन के बाद अनलॉक 1.0 में धीमी गति से ही सही लेकिन पावरलूम उद्योग रफ्तार पकड़ रहा है. इस बीच पड़ोसी देश चीन की सीमा पर की गई हरकत से बुरहानपुर के कपड़ा व्यवसायी और बुनकर खासे नाराज़ हैं. वैसे तो यहां बड़ी संख्या में पारंपरिक पावरलूम हैं, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब धीरे धीरे आधुनिक पावरलूम भी आ गए हैं. ये चीन से आयात होते हैं. काम आसान होने के कारण इनकी डिमांड भी तेज़ी से बढ़ी. लेकिन अब पहले कोरोना और फिर सरहद पर चीन की हरकतों से नाराज़ टेक्सटाइल कारोबारियों और बुनकरों ने चीन के बहिष्कार का फैसला कर लिया है. इन लोगों ने चीना पावरलूम और मशीनरी को ना कहने का फैसला किया है. इसके स्थान पर ये देश में ही बने आधुनिक पावरलूम लगाएंगे.

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स्वदेशी का समर्थन
स्व राजीव दीक्षित के स्वदेशी आंदोलन से जुडे राजेश बजाज ने भी इस फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा राजीव दीक्षित ने छोटे से उत्पाद से लेकर बड़े उत्पादों के लिए यह अभियान चलाया था जो आज सार्थक हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश में बनने वाले पावरलूम और कपड़े काफी महंगे होते थे, इसलिए टेक्सटाइल उद्योगपति चीन से पावरलूम और कपड़ा आयात करते हैं. लेकिन अब आयात बंद होगा तो देश में आधुनिक पावरलूम और कपड़े की मांग बढ़ेगी और जब मांग बढ़ेगी तो स्वाभाविक है लागत भी घटेगी और उनका दाम भी कम होगा. इससे देश के लोगों को रोजगार मिलेगा और पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी सफलता मिलेगी.


First published: June 26, 2020, 1:09 PM IST





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