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विश्व हिंदू परिषद की SC से अपील: जगन्नाथ रथ यात्रा पर बैन के फैसले की समीक्षा करें


पुरी की सालाना रथयात्रा के दौरान जुलाई, 2019 में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा का रथ खींचते श्रद्धालु (फोटो- PTI)

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महासचिव मिलिंद परांडे ने रविवार को कहा, “पुरी (Puri) की यह पारंपरिक सालाना भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा, जो पिछले कुछ सौ सालों से लगातार बिना रुके चली आ रही है, उसे इस साल भी आयोजित होना चाहिये.”

नई दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से गुजारिश की है कि वह पिछले हफ्ते के अपने उस आदेश पर पुनर्विचार करे, जिसमें कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार को देखते हुए पुरी में रथ यात्रा के समारोह पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सहयोगी संगठन ओडिशा के इस प्रसिद्ध कार्यक्रम को रद्द न किए जाने के खिलाफ मजबूती से प्रयास कर रहा है. ऐसा सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद किया जा रहा है, जिसमें इसने इस भव्य धार्मिक समारोह से जुड़ी सारी गतिविधियों पर रोक लगा दी थी, जिसमें दुनिया भर से लोग जुटते हैं.

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महासचिव मिलिंद परांडे ने रविवार को कहा, “पुरी (Puri) की यह पारंपरिक सालाना भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा, जो पिछले कुछ सौ सालों से लगातार बिना रुके चली आ रही है, उसे इस साल भी आयोजित होना चाहिये.” रथ यात्रा का आयोजन 23 जून को किया जाना था. इसे मुद्दा बनाते हुए वीएचपी ने सुझाया है कि रथ को सांकेतिक तौर पर हाथियों, मशीनों आदि से खींचा जाना चाहिए. उनके अलावा इसमें मंदिर में काम करने वाले पूरी तरह से स्वस्थ और कोविड-19 टेस्ट में निगेटिव पाए गये लोगों को शामिल किया जा सकता है.

वीएचपी ने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा करने का किया आग्रह
परांडे ने एक बयान में कहा, “COVID-19 महामारी संकट के खिलाफ सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के साथ रथयात्रा को पवित्र बड़ा दांडा (ग्रैंड एवेन्यू) में भी कराया जा सकता है. यात्रा की सालाना निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कोई रास्ता खोजना होगा. आज की परिस्थितियों में, शायद ही यह उम्मीद की जा सकती है कि यात्रा में एक लाख श्रद्धालु जुटेंगे.” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा करने का भी आग्रह किया.सुप्रीम कोर्ट ने रथयात्रा से जुड़ी सभी धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों पर लगाई थी रोक

गुरुवार को, मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा था कि यहां तक ​​कि भगवान जगन्नाथ भी शीर्ष अदालत को माफ नहीं करेंगे, अगर उसने कोविड-19 के मामलों के बीच समारोह की अनुमति दी. घातक महामारी से अब तक देश में 13,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

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अदालत ने कहा था, “हम यह निर्देश देते हैं कि इस वर्ष ओडिशा के मंदिर शहर या राज्य के किसी अन्य हिस्से में कहीं भी रथ यात्रा नहीं होगी. हम यह भी निर्देश देते हैं कि इस अवधि के दौरान रथयात्रा से जुड़ी कोई भी धर्मनिरपेक्ष या धार्मिक गतिविधि इस दौरान नहीं होगी.


First published: June 21, 2020, 5:43 PM IST





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