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ALERT! किसी भी वेबसाइट को खोलने पर हैक हो सकता है आपका फोन, इस नए तरीके को अपना रहे हैं हैकर्स


‘नेटवर्क इंजेक्शन’ के ज़रिए हैकिंग हो रही है.

नेटवर्क इंजेक्शन एक फुली ऑटोमेटेड तरीका है, जहां एक हमलावर एक सेलुलर सिग्नल (cellular signal) को अवरोध (intercept) करता है जब वह किसी वेबसाइट पर जाने का अनुरोध करता है.

हैकिंग (hacking) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अभी तक जो हमारे सामने जो जानकारियां आती रहीं है, उसमें हमेशा यही बताया गया है कि किसी अनजान लिंक, (unknown link) मैसेज पर क्लिक करने से हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन अब एक ऐसा मामला भी सामने आया है जहां किसी भी वेबसाइट पर विज़िट करने पर हैकिंग को अंजाम दिया गया है. मोरक्को के पत्रकार उमर रेडी (Omar Radi) चिप लगी हुए व्हाइट कलर का आईफोन (iPhone) इस्तेमाल करते थे, ताकि उनकी सरकार उनपर नज़र रख सके.

इस तरह सरकार उनकी हर ईमेल, टेक्स्ट और वेबसाइट पर भी जा सकती है. चिप लगाने का मकसद है कि वह पत्रकार की हर फोन कॉल को सुनें और हर वीडियो कॉन्फ्रेंस देखें; कैलेंडर एंट्रीज़ को डाउनलोड करें, GPS कॉरडिनेट्स की निगरानी करें, और यहां तक ​​कि ये देखने के लिए कि फोन मौजूदा समय में कहां है, कैमरा और माइक्रोफोन चालू करें.

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द स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक जैसा कि रेडी को एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा में ट्रेन किया गया था. उसने न तो किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था और न ही उसे वॉट्सऐप पर कोई मिस्ड कॉल आई. जानकारी के लिए बता दें कि इन दोनों तरीकों से फोन पर हैकिंग का खतरा रहता है. द स्टार ने Amnesty International के हवाले से लिखा कि रेडी एक नई और भयावह चोरी-छिपे तकनीक के ज़रिए टारगेट किया गया है. बताया गया कि रेडी के किसी भी वेबसाइट पर जानें से उसे टारगेट किया जा सकता है.रेडी के फोन पर एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा एकत्र किए गए फॉरेंसिक एविडेंस से पता चलता है कि फोन ‘नेटवर्क इंजेक्शन’ (Network injection) से संक्रमित था. नेटवर्क इंजेक्शन एक फुली ऑटोमेटेड तरीका है, जहां एक हमलावर एक सेलुलर सिग्नल (cellular signal) को अवरोध (intercept) करता है जब वह किसी वेबसाइट पर जाने का अनुरोध करता है.

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सेकेंड से भी कम में हो जाता है खेल
मिलीसेकंड में वेब ब्राउज़र को एक मैलिशियस वेबसाइट पर ले जाया जाता है और स्पाइवेयर कोड डाउनलोड किया जाता है जो फोन पर हर चीज को रिमोट एक्सेस की अनुमति देता है. फिर ब्राउज़र इच्छित वेबसाइट पर वापस भेजता और यूज़र को बेवकूफ बनाता है. हालांकि एमनेस्टी निश्चित रूप से ये नहीं बता सकती है कि इस हमले के पीछे मोरक्को के अधिकारी थे, लेकिन फोरेंसिक एविडेंस इसी बात का इशारा कर रहे हैं. इस पूरे मामले से ये नहीं पता चलता है कि सत्तावादी सरकारें सक्रिय रूप से कॉल सुन रही हैं, वेब ट्रैफिक की निगरानी कर रही हैं और पत्रकारों के ईमेल पढ़ रही हैं या नहीं लेकिन वे ऐसा कर सकते हैं.

रेडी ने राबट से एक एन्क्रिप्टेड वीडियो चैट पर कहा ‘मुझे शक था (मुझे हैक कर लिया गया था)’. मोरक्को के अधिकारी हर संभव और कल्पनाशील निगरानी और जासूसी उत्पाद खरीद रहे हैं, क्योंकि वह सबकुछ जानना चाहते हैं.


First published: June 23, 2020, 10:27 AM IST





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