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UP के पहले डिटेंशन सेंटर को लेकर सियासत शुरू, मायावती का ट्वीट- फैसला वापस ले सरकार


बसपा सुप्रीमो मायावती(File Photo)

बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने ट्वीट किया है कि गाजियाबाद में बीएसपी सरकार द्वारा निर्मित बहुमंजिला डॉ. अम्बेडकर एससी/एसटी छात्र हास्टल को ’अवैध विदेशियों’ के लिए यूपी के पहले डिटेन्शन सेन्टर के रूप में कनवर्ट करना अति-दुःखद व अति-निन्दनीय है.

गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के लिए गाजियाबाद (Ghaziabad) में डिटेंशन सेंटर (Detention Center) बनकर तैयार हो चुका है. माना जा रहा है कि अक्टूबर में इसकी शुरुआत हो जाएगी. देश में अभी तक कुल 11 डिटेंशन सेंटर चलाए जा रहे हैं और 12वां डिटेंशन सेंटर  गाजियाबाद के नंद ग्राम में बनाया गया है. उधर मामले में सियासत भी तेज हो गई है. बसपा सुप्रीमो मायावती (BSP Supremo Mayawati) ने अम्बेडकर हॉस्टल को यूपी के पहले डिटेंशन सेंटर के रूप में बनाने के योगी सरकार के इस कदम को निंदनीय बताया है. उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है.

मायावती ने ट्वीट किया है, “गाजियाबाद में बीएसपी सरकार द्वारा निर्मित बहुमंजिला डॉ. अम्बेडकर एससी/एसटी छात्र हास्टल को ’अवैध विदेशियों’ के लिए यूपी के पहले डिटेन्शन सेन्टर के रूप में कनवर्ट करना अति-दुःखद व अति-निन्दनीय. यह सरकार की दलित-विरोधी कार्यशैली का एक और प्रमाण. सरकार इसे वापस ले बीएसपी की यह मांग.

100 लोगों को रखने की व्यवस्था मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह डिटेंशन सेंटर सभी सुविधाओं से लैस होगा और एकदम खुली जेल की तरह होगा. इस डिस्टेंशन सेंटर में 100 लोगों को रखे जाने का इंतजाम किया गया है. प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी मुख्य बातों को ध्यान में रखते हुए यहां का दौरा भी कर लिया है और सुरक्षा की दृष्टि से भी स्थानीय पुलिस को यह सौंपा जा चुका है.

https://www.youtube.com/watch?v=CaEHhMkJIDo

बसपा सरकार के दौरान बनाया गया था अम्बेडकर हॉस्टल

गाजियाबाद के नंदग्राम में दलित छात्र छात्राओं के लिए अलग-अलग दो अंबेडकर छात्रावास प्रशासन द्वारा बनाए गए थे. दोनों छात्रावास की क्षमता 408 छात्र-छात्राओं की है. यह जनवरी 2011 में बनकर तैयार हो गया था और इसकी शुरुआत भी 15 जनवरी 2011 को ही कर दी गई थी. यह छात्रावास पूरी सुविधाओं से लैस बनाया गया था लेकिन काफी समय से यह छात्रावास बंद है.

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इतना ही नहीं इसकी देखरेख ना होने के कारण भी यह जर्जर हालत में हो चुका था. योगी सरकार के आने के बाद बंद पड़े इस छात्रावास की सुध ली गई और इस छात्रावास को डिटेंशन सेंटर बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया. इसे केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार करते हुए इस छात्रावास को डिटेंशन सेंटर में तब्दील कर दिया गया. साथ ही प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार द्वारा जारी बजट पर इसकी मरम्मत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेरठ की एजेंसी को ठेका दिया गया था.

खुली जेल की तरह व्यवस्था में जाएंगे विदेशी

फिलहाल डिटेंशन सेंटर में सभी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए यहां पर पूरा निर्माण करा दिया गया है और अब खुली जेल की तरह यहां पर 100 विदेशियों को रहे जाने की व्यवस्था की गई है. सुरक्षा की दृष्टि से भी यहां की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस को सौंपी गई है. उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर में इसकी शुरुआत हो सकती है.





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