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आवश्यक वस्तु संशोधन बिल: किसान संगठनों ने गिनाए ये नुकसान, सरकार ने बताए फायदे


आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक संसद में पारित

आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक संसद में पारित होने के खिलाफ किसानों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि इस विधेयक के कई फायदे बताए हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 16, 2020, 8:39 AM IST

नई दिल्ली. अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्‍याज, आलू को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान करने वाले आवश्यक वस्तु संशोधन बिल (Essential Commodities Amendment Bill 2020) को संसद के निचले सदन में पारित कर दिया गया. लेकिन इसके खिलाफ किसानों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा. बृहस्पतिवार को मध्य प्रदेश के विदिशा में इसके खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ की रैली है. इसके नेता राहुल राज का कहना है कि इन वस्तुओं को अब सरकार खरीदे या न खरीदे, इसकी गारंटी नहीं होगी. जबकि सरकारी खरीद में ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी होती है.

ऐसे में सरकारी खरीद बंद होने पर किसानों का निजी मंडियों में व्यापारियों के हाथों लुटना तय है. जब से इसकी घोषणा हुई मध्य प्रदेश सरकार ने मक्का और मूंग का एक दाना भी नहीं खरीदा. अब यही हाल अन्य फसलों का भी होगा. आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को कृषि उपज को जमा करने की अधिकतम सीमा तय करने और कालाबाजारी रोकने के लिए बनाया गया था. लेकिन नई व्यवस्था में स्टॉक लिमिट यानी जमा करने की सीमा को हटा लिया गया है. अब कोई कितना भी जमा कर सकता है. इससे जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ेगी. किसान लुटेगा और महंगाई भी बढ़ेगी. खाद्यान्न पर उद्योगपतियों का एकाधिकार हो जाएगा.

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कुछ व्यापारियों को लगता है कि जब किसी वस्तु को जमा करने की सीमा खत्म कर दी गई है तो बड़े उद्योगपति अपने गोडाउन में ज्यादा माल भरकर बाजार में अपना एकाधिकार चलाएंगे. वे ज्यादा दाम पर बेचेंगे. अब इसमें संशोधन करके सरकार ने उन्हें कालाबाजारी करने की खुली छूट दे दी है. ऐसे में छोटे व्यापारी कहां जाएंगे. कुछ पार्टियों ने लोकसभा में कहा कि इस बिल को लेकर पंजाब के किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के बीच बहुत आशंकाएं हैं. संशोधित बिल से किसानों के बजाय बिचौलियों को फायदा पहुंचेगा. किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदने की गारंटी भी नहीं है.ये भी पढ़ें :PM-किसान सम्मान निधि स्कीम घोटाला: मोदी सरकार ने कहा-किसानों की पहचान करना राज्यों का काम

हालांकि, सरकार का कहना है कि देश में ज्‍यादातर कृषि उत्पाद सरप्‍लस हैं, इसके बावजूद कोल्‍ड स्‍टोरेज और प्रोसेसिंग के अभाव में किसान अपनी उपज का उचित मूल्‍य पाने में असमर्थ रहे हैं. क्‍योंकि आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम की तलवार लटकती रहती थी. ऐसे में जब भी जल्दी खराब हो जाने वाली कृषि उपज की बंपर पैदावार होती है, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था. इसलिए आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम में संशोधन करके अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू आदि को इस एक्‍ट से बाहर किया गया है. जब सरकार को जरूरत महसूस होगी तो वो फिर से पुरानी व्यवस्था लागू कर देगी.





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