Home Health & Fitness इंटरनेट की लत कहीं आपको तो नहीं? ऐसे पाएं छुटकारा

इंटरनेट की लत कहीं आपको तो नहीं? ऐसे पाएं छुटकारा


इंटरनेट एडिक्शन (Internet addiction) यानी इंटरनेट की लत एक ऐसी बीमारी से जिसके बारे में खुद को पता ही नहीं लगता. जो व्यक्ति इसका शिकार होता है वह भी मानने के लिए तैयार ही नहीं होता कि वह इंटरनेट एडिक्टेड है. आज हर किसी के हाथ में मोबाइल (Mobile) दिखता है. यह मोबाइल धारे-धीरे लोगों की आदत में शुमार हो जाता है. मोबाइल न मिलने पर लोगों को बेचैनी होने लगती है.

इंटरनेट पर लगे रहने की आदत से माता-पिता या परिजन खूब परेशान हो जाते हैं. माता-पिता अधिकतर शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा ज्यादा से ज्यादा समय ऑनलाइन बिताता है, लेकिन उनको यह जानकारी नहीं होती कि इंटरनेट की लत किसी के जीवन को कैसे प्रभावित कर सकती है. कोई व्यक्ति इंटरनेट का आदी है या नहीं इसके बारे में आप जानना चाहते हैं तो इन सात लक्षणों को देखकर समझ सकते हैं.

सोशल लाइफ का ना होना
अगर कोई आदमी अधिकांश समय सोशल मीडिया जैसे फैसबुक और वाट्सएप पर अपने दोस्तों से बात करता है तो समझ जाना चाहिए कि उसे इंटरनेट की लत है. घर में होकर परिवार के साथ समय बिताने की बजाए मोबाइल पर लगे रहने का मतबल है कि आप इंटरनेट की लत के शिकार हो गए हैं.खुद पर ध्यान नहीं देना

खाना सामने रखा होने पर भी मोबाइल या कंप्यूटर पर लगे रहना. नहाने से पहले सोशल मीडिया का प्रयोग करना और नहाने में देरी करना. फेसबुक और वाटसऐप चलाने के कारण सोने में देरी करना और भी काम देर से करना. सो कर उठते ही सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाना. इससे पता चलता है कि आप इंटनेट की लत के शिकार हो चुक हैं.

प्रोडक्टिविटी पर असर
ऑफिस का काम करते हुए भी अपने असाइनमेंट पर काम करने की बजाय ऑनलाइन बहुत समय बर्बाद कर रहे हैं. यही नहीं इस वजह से डेडलाइन्स मिस कर रहे हैं और काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तो समझ जाएं कि इंटरनेट एडिक्शन हो गया है.

वाईफाई काम नहीं करने पर अजीब सा डर

थोड़ी देर के लिए भी इंटरनेट न चले तो एक अजीब सा डर, बेचैनी, घबराहट, चिढ़, चिंता और उदासी होने लगती है तो समझ जाइए कि सामने वाला इंटरनेट की लत का शिकार हो गया है. ये लक्षण इतने गंभीर हो सकते हैं कि व्यक्ति समझ ही नहीं पाता है कि इंटरनेट के बिना उसे अपने आप से क्या करना है.

अपराध बोध का होना
ऑनलाइन कितना समय बिताते हैं, इसके कारण व्यक्ति खुद को दोषी और उदास महसूस करता है. इसके बावजूद उसे ऑफलाइन जाने में मुश्किल होती है, क्योंकि वह ऑनलाइन होने पर ही खुश और संतुष्ट महसूस करता है.

झूठ बोलना शुरू कर दिया है
जब माता-पिता, पार्टनर या यहां तक कि दोस्त इस बारे में बात करते हैं कि ऑनलाइन कितना समय खर्च करते हैं तो व्यक्ति खुद का बचाव करने लगता है. वह खुद को लगातार अपने इंटरनेट के उपयोग और ऑनलाइन बिताए समय के बारे में झूठ बोलता है.

शारीरिक पर होता है ये असर
डॉक्टरों के अनुसार, ऑनलाइन लत से अनिद्रा, सिरदर्द, उनींदापन, पीठ दर्द, या तो वजन बढ़ना या वजन कम होना, आंखों की समस्या जैसी शारीरिक बीमारियां होती हैं. अगर ये समस्याएं हैं तो समझ जाइए कि कहीं न कहीं इंटरनेट एडिक्शन का शरीर पर दुष्प्रभाव हो रहा है.

क्या है इस लत का इलाज
इस एडिक्शन का इलाज भी संभव है. इसके लिए कॉग्नेटिव बिहेवियरियल थेरेपी दी जा सकती है, जिसमें लोगों को अपनी परेशानियों का हल इंटरनेट पर नहीं ढूंढना चाहिए. myUpchar से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि इसमें व्यक्ति को यह समझने में मदद मिलती है कि उसके व्यवहार में बदलाव किस तरह से उसके अहसास या भावनाओं में बदलाव लाता है. यह थेरेपी व्यक्ति को सकारात्मक और सामाजिक रूप से जोड़ने वाली गतिविधियों पर ध्यान देती है. काउंसलिंग के अलावा किसी सपोर्ट ग्रुप में जाना फायदेमंद साबित हो सकता है.
अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, नशे की लत के लक्षण, उपाय और जोखिम

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