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कड़ाके की सर्दी में भी लद्दाख से नहीं हटेगी भारतीय सेना, चीन के खिलाफ की है खास तैयारी


सर्दियों में पूर्वी लद्दाख में तैनाती का मौजूदा स्तर बरकरार रखने की तैयारी कर रही है भारतीय सेना

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) वास्तविक नियंत्रण रेखा/एलएसी (LAC) के पास सीमावर्ती सैन्य अड्डों पर अत्यधिक सतर्कता बरतेगी और नौसेना भी चीन (China) पर दबाव बनाए रखने के लिए हिंद महासागर (Indian Ocean) क्षेत्र में आक्रामक तैनाती बरकरार रखेगी.

नई दिल्ली. भारतीय सेना (Indian Army) पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में चीन (China) के साथ सीमा विवाद (Border Dispute) का समाधान जल्द निकल पाने के संकेत नहीं मिलने के मद्देनजर पर्वतीय क्षेत्र के सभी अहम स्थानों पर सैन्य बलों, टैंकों और अन्य हथियारों की मौजूदा संख्या को सर्दियों के महीनों में भी बरकरार रखने की तैयारी कर रही है. इस संबंधी घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि भारतीय वायुसेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सीमावर्ती सैन्य अड्डों पर अत्यधिक सतर्कता बरतेगी और नौसेना भी चीन पर दबाव बनाए रखने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में आक्रामक तैनाती बरकरार रखेगी.

उन्होंने कहा कि भारतीय थलसेना पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक तैनात रहने के लिए व्यापक तैयारियां कर रही है. सैन्य वार्ता के पांचवें दौर के संबंध में चीनी सेना ने अभी पुष्टि नहीं की है. यह वार्ता पहले इस सप्ताह होने की उम्मीद थी. अधिकारियों ने बताया कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों और सामरिक विशेषज्ञों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी और अन्य स्थानों पर समग्र हालात का शनिवार को जायजा लिया. उन्होंने बताया कि थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे तैयारियों के संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को नियमित रूप से जानकारी दे रहे है.

अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में ज्‍यादा तैयारी की जरूरत
सरकारी सूत्रों ने कहा कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में बलों और हथियारों का मौजूदा स्तर बरकरार रखने के लिए वृहद तैयारियों की आवश्यकता होगी, क्योंकि सर्दी के मौसम में क्षेत्र में तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर जाता है. एक सूत्र ने कहा, ‘हम तैनाती का मौजूदा स्तर बरकरार रखने की तैयारी कर रहे हैं. वर्तमान परिदृश्य के आकलन के आधार पर अभी तक यही योजना है.’ सूत्रों ने बताया कि सरकार ने क्षेत्र में तैनात अपने जवानों के लिए आवश्यक कपड़ों और अन्य उपकरण की खरीदारी आरंभ कर दी है.उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाएं उम्मीद कर रही हैं कि पैंगोग सो पर फिंगर प्वाइंट से बलों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को आगे ले जाने संबंधी कार्यप्रणाली पर चर्चा के लिए कोर कमांडर स्तर की वार्ता का अगला दौर आगामी सप्ताह में होगा. गलवान घाटी में 15 जून को चीनी बलों के साथ झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद भारत ने हजारों अतिरिक्त बलों और हथियारों को पूर्वी लद्दाख में सीमा के पास भेजा था. चीन ने भी सीमा पर अपनी सैन्य तैनाती मजबूत की है.

भारत ने चीन से की ये मांग
सूत्रों ने बताया कि चीनी सेना ने गलवान घाटी और टकराव के अन्य बिंदुओं से अपने बलों को पीछे हटा लिया है, लेकिन भारत ने पैंगोंग सो में फिंगर प्वाइंट्स से भी बलों को पीछे हटाने की मांग की है. इन क्षेत्रों से चीन ने बलों को वापस नहीं बुलाया है. क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लक्ष्य से पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाली जगह से सेनाओं की वापसी को लेकर अभी तक दोनों देशों की सेनाओं के शीर्ष सैन्य कमांडरों के बीच चार चरण की वार्ता हो चुकी है.

गौरतलब है कि पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर करीब दो घंटे तक पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिये चर्चा की थी. दोनों पक्षों ने इस वार्ता के बाद छह जुलाई के बाद पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की थी.





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