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कोरोना की दवा पर एक और उम्मीद: Favipiravir पर बड़ा शोध करने की तैयारी में वैज्ञानिक


निखिल घनेकर
नई दिल्ली. 
देश की दवा नियामक संस्था DCGI ने ग्लेनमार्क के फैबीफ्लू (Fabiflu) को मंजूरी दे दी है. इसके बाद सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और सिप्ला इसके असर और सुरक्षा की जांच करने के लिए दवा का बड़ा और अलग-अलग केंद्रों पर कोविड-19 मरीजों के बीच क्लिनिकल ट्रायल करेगा. सीएसआईआर के  डायरेक्टर जनरल डॉ. शेखर मंडे ने News18 को बताया कि ‘CSIR, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के साथ मिलकर ड्रग्स के ट्रायल करने के नए प्रस्ताव भी पेश करने जा रहा है.’

साइंस एंड टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री के अंतर्गत CSIR ने मौजूदा दवाओं के दोबारा इस्तेमाल पर फोकस किया है जिन्हें वैश्विक रूप से एंटीवायरल दवा के रूप में इस्तेमाल किया गया है. सीएसआईआर ने सिप्ला और सन फार्मा जैसी दवा कंपनियों के साथ साझेदारी की है. वैज्ञानिक संस्था और इसके साझेदारों को चार दवाओं के लिए क्लिनिकल ट्रायल स्वीकृति मिली है जिसमें सेप्सिवैक, एसीएचक्यू (एक फाइटोफार्मास्युटिकल प्लांट आधारित दवा), फेवीपिरवीर और उमिफेनोविर शामिल है. सेप्सिवैक और फेवीपिरवीर ट्रायल के तीसरे फेज में है.

रिपर्पस्ड दवाओं पर ट्रायल के रिजल्ट्स सही दिशा मेंडॉ. शेखर मांडे ने कहा, ‘रिपर्पस्ड दवाओं पर ट्रायल के रिजल्ट्स सही दिशा में हैं और हमारे पास कुछ अच्छे संकेत हैं. सिप्ला पहले से ही फेवीपिरवीर ट्रायल कर रहा है. पहले के ट्रायल्स में सीमित संख्या में लोग थे. लेकिन अब हमें 600-700 लोगों पर बहुत बड़े ट्रायल की जरूरत है और हम इस मुद्दे पर DCGI से संपर्क करेंगे.’ उन्होंने कहा ‘इसके अलावा हमने दवाओं के तीन से चार कॉम्बिनेशन्स के ट्रायल्स पर प्रपोजल भी तैयार किया है. अभी से हमारा जोर कॉम्बिनेशन पर होगा. इन दवाओं में से एक एंटीवायरल दवा होगी. हम इन प्रस्तावों को आने वाले दिनों में DCGI को सौंपेंगे.’

क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री की वेबसाइट के अनुसार ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड फेवीपिरवीर की तुलना में फेवीपिरवीर और उमिफेनोविर कंपोजिशन के असर और सुरक्षा का के बारे में जानने के लिए एक रैंडम ओपन-लेबल स्टडी कर रही है. अस्पताल में भर्ती कोविड -19 के उन रोगियों पर ट्रायल किया जा रहा है जिनमें हल्के लक्षण हैं.

ट्रायल्स हल्के लक्षण वाले रोगी किया जाएगा
इस बीच सिप्ला फिलहाल फेवीपिरवीर ट्रायल्स के थर्ड फेज में है जिसे देश में आठ केंद्रों पर किया जा रहा है. इन आठ केंद्रों में से पांच ने फेज -3 के ट्रायल्स को मंजूरी दे दी है. ये रैंडम ओपन लेबल, प्रॉस्पेक्टिव और कंपरैटिव क्लिनिकल ट्रायल करेंगे. यह ट्रायल्स हल्के लक्षण वाले रोगी किया जाएगा जो फेवीपिरवीर के असर और सुरक्षा के बारे में पता लगाएंगे.

डॉ. मांडे ने कहा कि ‘ग्लेनमार्क ने स्वतंत्र रूप से काम किया वहीं Favipiravir दवा के रिसर्च और एक्चुअल सिंथेसिस पर CSIR आगे बढ़ा. फेवीपिरवीर एक कंपाउंड है और बड़ी मात्रा में केमिकल स्ट्रक्चर बनाने के लिए आपको जरूरी मैटेरियल्स की आवश्यकता होती है. केमिकल सिंथेसिस के जरिए आपको आखिरी कंपाउंड बनाना होगा. हमने एंड-टू-एंड प्रॉसेस बनाया और इसे सिप्ला को सौंप दिया.’

डॉ. मांडे ने कहा – ‘हम जानते हैं कि हमारी लैब्स की सीमाएँ हैं जबकि कंपनियां बड़े पैमाने पर काम कर सकती हैं लेकिन उन्हें हमारे तकनीकी ज्ञान की जरूरत है.’


First published: June 24, 2020, 11:10 AM IST





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