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क्या चीन पर मनमोहन सिंह के बयान से राहुल गांधी को राजनीतिक ताकत मिलेगी?


पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के साथ सीमा विवाद पर बयान जारी किया है.

चीन के साथ सीमा विवाद (China-India Standoff) को लेकर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ अब पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने सीमा विवाद पर बयान जारी किया है.

नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के तेवर देखते हुए स्पष्ट है कि चीन के मुद्दे पर (China-India Standoff) पार्टी अब पीछे हटने के तैयार नहीं है. पार्टी के आक्रामक तेवरों को देखते हुए स्पष्ट है कि चीन के मुद्दे पर राष्ट्रविरोधी होने और सरकार के साथ एकजुटता न दिखाने के आरोप मढ़े जाने के बावजूद भी कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सत्तारूढ़ सरकार से जवाब मांगती रहेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घरेती रहेगी.

क्या बोले मनमोहन सिंह
इस मुहिम में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जुड़ गए. सोमवार सुबह उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘प्रधानमंत्री को देश की सुरक्षा और सीमाओं से जुड़े मसलों और रणनीति के बारे में बोलते वक्त अपने हर शब्द के बारे में सजग रहना चाहिए. प्रधानमंत्री को अपने शब्दों व घोषणाओं द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक तथा भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए. प्रजातंत्र में यह जिम्मेदारी देश के प्रधानमंत्री की होती है.’

‘चीन के सामने नहीं झुक सकते’उन्होंने आगे कहा कि चीन गैरकानूनी तरीकों और बेशर्मी के साथ गलवान घाटी और पैंगगोंक टीएसओ झील पर अपनी दावेदारी दिखा रहा है, वहां अप्रैल 2020 से लेकर अब तक कई तरह से घुसपैठ कर चुका है. हम चीन की धमकियों के सामने नहीं झुक सकते और न ही उसे भारतीय सीमाओं की अखंडता से किसी भी तरह का समझौता करने की इजाजत दे सकते हैं.

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मनमोहन सिंह ने यह हिदायत भी दी कि प्रधानमंत्री मोदी को अपने बयान से चीन के साजिश भरे रुख को ताकत नहीं देनी चाहिए और सरकार के सभी अंगों को मिलकर मौजूदा चुनौती का सामना करना चाहिए. सिंह ने यह भी कहा कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति एवं मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता तथा यह सुनिश्चित होना चाहिए कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाए.

उन्होंने कहा, यह एक ऐसा मौका है जबकि चीन के इस बेशर्मी भरी धमकी के खिलाफ एक देश की तरह एकजुट होकर खड़े रहना चाहिए. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन तनाव के मुद्दे पर शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इसमें कहा था कि न कोई हमारे क्षेत्र में घुसा और न ही किसी ने हमारी चौकी पर कब्जा किया है. उनके इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सर्वदलीय बैठक में की गई टिप्पणियों की कुछ हलकों में ‘शरारतपूर्ण व्याख्या’ की कोशिश की जा रही है.

पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने बयान में कहा, ’15-16 जून, 2020 को गालवान घाटी में भारत के 20 बहादुर जवानों ने वीरता के साथ अपना कर्तव्य निभाते हुए देश के लिए अपनी जान दे दी. इस सर्वोच्च बलिदान के लिए हम इन साहसी सैनिकों एवं उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञ हैं. लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए.’ सिंह ने कहा, ‘आज हम इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर हैं. मौजूदा सरकार के फैसले और उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आकलन कैसे करेंगी.’

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क्या राहुल गांधी को होगा फायदा?
हालांकि पार्टी और राहुल गांधी के इस आक्रामक रुख का सियासी गलियारों में अलग-अलग तरह से विश्लेषण हो सकता है. कुछ लोग कह सकते हैं कि चीन के मुद्दे पर पार्टी का यह आक्रामक रुख राहुल गांधी की वापसी में मददगार साबित होगा तो इस बीच कुछ लोग इसे राफेल-2 भी करार दे रहे हैं. दरअसल कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2019 में राहुल गांधी के नेतृत्व में राफेल मुद्दे पर भाजपा और नरेंद्र मोदी को जमकर घेरने की कोशिश की थी. लेकिन उनका यह वार निशाने पर बैठने की जगह बैकफायर कर गया था. (पल्लवी घोष की स्टोरी से इनपुट्स के साथ.)


First published: June 22, 2020, 2:37 PM IST





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