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क्या वैक्सीन आने पर भाग जाएगा कोरोना? जानिए अन्य् बीमारियों में कितनी कामयाब रही है वैक्सीन


नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने के बाद अब भारत को बुरी तरह चपेट में ले लिया है. कोरोना वायरस के बार-बार रूप बदल लेने और स्‍थाई इलाज न होने के बाद अब इसकी वैक्‍सीन को ही एकमात्र मजबूत विकल्‍प के रूप में देखा जा रहा है. वैक्‍सीन से वायरस पर नियंत्रण करने की उम्‍मीद के कारण ही पूरी दुनिया में वैक्‍सीन बनाने को लेकर रिसर्च और ट्रायल चल रहे हैं. हालांकि प्रभावी वैक्‍सीन कब तक आएगी इस पर दुनिया के विशेषज्ञ तय समय नहीं बता पा रहे हैं.

बावजूद इसके कुछ बड़े सवाल और भी हैं कि क्‍या वैक्‍सीन आने से कोरोना भाग जाएगा. क्‍या वैक्‍सीन से कोरोना नियंत्रित होने के साथ ही लोग दोबारा इस बीमारी की चपेट में आने से बच जाएंगे. भारत में आज भी कई बीमारियों के टीके लगाए जाते हैं तो क्‍या वैक्‍सीन से ये बीमारियां नियंत्रित हो गई हैं. अन्‍य बीमारियों में वैक्‍सीन कितनी सफल या असफल रही है ?

ऐसे में अन्‍य बीमारियों पर वैक्‍सीन के परिणामों के आधार पर कैसा रह सकता है कोरोना की आने वाली वैक्‍सीन का असर, इस पर ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के महासचिव डॉ. नरेंद्र सैनी ने न्‍यूज 18 हिन्‍दी से बात की हैं.

डॉ. एमसी मिश्र और डॉ. नरेंद्र सैनी कहते हैं कि कोरोना की वैक्‍सीन बनना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है. इसमें कई वर्ष तक लग जाते हैं. लेकिन अगर वैक्‍सीन समय से आ जाती है और प्रभावी रहती है तो यह कोरोना की कमर तोड़ने में सफल होगी. वे कहते हैं कि अन्‍य बीमारियों के लिए भी भारत में वैक्‍सीन लगाई जाती है, जिनके परिणाम काफी अच्‍छे भी रहे हैं. वहीं कुछ बीमारियों की वैक्‍सीन असफल भी रही हैं. ऐसे में इन मौजूदा वैक्‍सीनों के प्रभावों से कोरोना को लेकर एक अनुमान लगाया जा सकता है.देश में इन बीमारियों की वैक्‍सीन रही हैं कामयाब

विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अभी तक संक्रमण से फैलने वाली तमाम बीमारियों की वैक्‍सीन लगाई जाती हैं. अपने देश में ही ऐसी कई वैक्‍सीन हैं जो काफी हद तक सफल रही हैं. डॉ. मिश्र बताते हैं कि देश में मीजल्‍स, मम्‍स और रुबेला के लिए लगने वाला एमएमआर टीका, डिप्‍थीरिया, काली खांसी के लिए लगने वाला डीपीटी, हेपेटाइटिस बी, स्‍मॉलपॉक्‍स, टॉयफॉयड, हैजा, पीला बुखार आदि की वैक्‍सीन 90 से 95 फीसदी तक सफल रही हैं. इन वैक्‍सीन के लगने के बाद बेहद कमजोर इम्‍यूनिटी का व्‍यक्ति ही इन बीमारियों की चपेट में आता है. देश में भी इन बीमारियों के फैलने के मामले अब कम हो गए हैं. हालांकि वैक्‍सीन आने के बाद इन बीमारियों को नियंत्रित होने में एक लंबा वक्‍त लगा है.

एम्‍स में चल रहा है कोवैक्सिन का ह्यूमन ट्रायल.

इन बीमारियों की वैक्‍सीन नहीं बनी या फिर हो गईं असफल  

डॉ. नरेंद्र सैनी बताते हैं कि वायरस की एक खास बात होती हैं कि यह अपना स्‍ट्रेन बदल लेता है. जिसकी वजह से एक वैक्‍सीन इसके लिए कारगर नहीं हो सकती. इसके बावजूद कोरोना की वैक्‍सीन अगर बन जाती है तो कितनी कारगर रहेगी कहना बेहद मुश्किल है क्‍योंकि अभी तक डेंगू , इबोला, मलेरिया, सार्स, मर्स, एच-1एन-1 जैसी बीमारियों की वैक्‍सीन नहीं बन पाई है या फिर बनी भी है तो सफल नहीं हो सकी है. इन्‍फ्लुएंजा की वैक्‍सीन है जिसे हर साल लगाना होता है. अगर किसी साल नहीं लग पाई तो बीमारी की चपेट में आने की पूरी संभावना होती है.

ए‍क समय में कोरोना से भी ज्‍यादा खतरनाक रहा है खसरा

डॉ. एमसी मिश्र बताते हैं कि अपने यहां होने वाला खसरा एक समय में बेहद भयानक बीमारी रह चुका है. खसरा का संक्रमण 18-20 गुना ज्‍यादा रहा है. जबकि कोरोना का संक्रमण रेट दो से तीन गुना ही है. जब किसी को खसरा होता था तो एक व्‍यक्ति से करीब 18-20 लोगों को हो जाता था. जबकि कोरोना संक्रमित व्‍यक्ति से 3-4 लोगों में ही फैलता है. लेकिन खसरे के लिए लगाए जाने वाले टीके के बाद इसे नियंत्रित करने में मदद मिली है. आज बचपन में ही टीका लगने के बाद बहुत कम मामलों में खसरा होने की शिकायत आती है. हालांकि टीके की डोज और बूस्‍टर डोज आदि तय की गई हैं.

विशेषज्ञों को कब तक है कोरोना वैक्‍सीन आने की उम्‍मीद

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस वक्‍त कोई भी डॉक्‍टर या वैज्ञानिक कोरोना वैक्‍सीन के आने का फिक्‍स समय नहीं बता सकता है. डॉ. सैनी कहते हैं कि वैक्‍सीन का ट्रायल चल रहा है. इसके पांच फेज होते हैं हालांकि तीन फेज के बाद वैक्‍सीन के बाजार में आने की बात कह रहे हैं लेकिन अगर किसी फेज में ट्रायल सफल नहीं हुआ तो वापस जीरो पर आ जाएंगे, तो फिर कैसे बताया जा सकता है कि वैक्‍सीन तब तक आ जाएगी. वहीं डॉ. मिश्र कहते हैं कि सही वैक्‍सीनेशन के साथ ही इसका सुरक्षित होना एक और महत्‍वपूर्ण पहलू है. वरना ऐसा भी हो सकता है कि एक बीमारी से बचने की कोशिश में कहीं दूसरी बीमारी न ले ली जाए. चूंकि वैक्‍सीन बनना एक लंबा प्रोसेस है और इसमें चार से पांच साल का समय लग जाता है. ऐसे में अगर वैक्‍सीन जल्‍दी आ जाती है और प्रभावी रहती है तो यह बहुत ही अच्‍छा होगा.

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1 भारत में कोरोना की तीन
वैक्सीन पर काम जारी है. ( कॉन्सेप्ट इमेज.)

भारत में  जन्‍म से ही लगते हैं ये टीके

जन्‍म पर- भारत में जन्‍म से ही बच्‍चों को टीके लगाये जाते हैं. जन्‍म के 24 घंटे के अंदर बच्‍चे को बीसीजी, ओरल पोलियो वैक्‍सीन ओपीवी और हेपेटाइटिस बी का बर्थ डोज दिया जाता है.

छह हफ्ते की उम्र में- पेन्‍टा-1 (डीपीटी, हिपेटाइटिस बी की बूस्‍टर डोज और एचआईवी वन), ओपीवी, एफ-आईपीवी

दस हफ्ते पर- ओपीवी-2 और पेन्‍टा-2

चौदह हफ्ते पर- ओपीवी-3, पेंटा-3, एफ-आईपीवी-2 , आईपीवी

छह महीने की उम्र में- टॉयफॉयड कॉन्‍जुगेट वैक्‍सीन

नौ महीने की उम्र में-खसरा, मम्‍स और रुबेला (MMR-1)

12 महीने की उम्र में- हेपेटाइटिस ए और इन्‍फ्ल्‍ूएंजा का हर साल लगने वाला टीका

15 महीने की उम्र में-एमएमआर-2

16 से 18 महीने की उम्र में- ओपीवी बूस्‍टर, डीपीटी बूस्‍टर-1

4 से 6 साल की उम्र में- डीपीटी बूस्‍टर-2, एमएमआर-3

9 से 14 साल की उम्र में- एचपीवी-1-2

15 से 18 साल की उम्र में- एचपीवी एक-दो-तीन

वैक्‍सीन के भरोसे रहना ठीक नहीं, बरतें एहतियात

डॉ. मिश्र और डॉ. सैनी कहते हैं कि वैक्‍सीन की उम्‍मीद में बैठे रहना ठीक नहीं है. सभी को कोरोना से बचने की जरूरी एहतियात बरतनी ही होंगी. मास्‍क, सेनिटाइजर, सोशल डिस्‍टेंसिंग के साथ ही घरों में पल्‍समीटर, थर्मामीटर रखकर नियमित जांच करनी होगी. इम्‍यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ आदि का सेवन करना होगा. इन्‍फेक्‍शन को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी उपाय करने होंगे.





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