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चीन से आने वाले निवेश पर SEBI की बोर्ड मीटिंग आज, इन फाइनेंशियल मुद्दों पर भी होगी चर्चा


चीन से आने वाले निवेश पर SEBI की बोर्ड मीटिंग आज, इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा

आज मार्केट रेगुलेटर सेबी की बोर्ड बैठक है जिसमें ओपन ऑफर पर ढ़ील देने पर चर्चा संभव है. इसके अलावा इस बैठक में Preferential Allotment में ढील पर विचार संभव है. मार्केट रेगुलेटर आज बोर्ड मीटिंग में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर (FPI) रूट से आने वाले चाइनीज इनवेस्टमेंट के मामले पर भी विचार कर सकता है.

नई दिल्ली. आज मार्केट रेगुलेटर सेबी की बोर्ड बैठक है जिसमें ओपन ऑफर पर ढ़ील देने पर चर्चा संभव है. इसके अलावा इस बैठक में Preferential Allotment में ढील पर विचार संभव है. Preferential Allotment की प्राइसिंग में नरमी लाने के प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया जा सकता है. अभी 26 हफ्ते के औसत भाव प्राइसिंग करना होता है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सेबी आज की बैठक में 2 हफ्ते के भाव पर प्राइसिंग को मंजूरी दे सकता है. इसके अलावा आज होने वाली सेबी की इस बैठक में चुनिंदा केसों के ब्लैक लॉग के क्लीयरिंग के लिए स्पेशल वीडियो बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है.

चीनी कंपनियों पर नजर
मार्केट रेगुलेटर आज बोर्ड मीटिंग में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर (FPI) रूट से आने वाले चाइनीज इनवेस्टमेंट के मामले पर भी विचार कर सकता है. मनीकंट्रोल ने पहले भी यह खबर दी थी कि सरकार ने सेबी को भारतीय कंपनियों में होने वाले चाइनीज इनवेस्टमेंट की निगरानी करने को कहा है.

ये भी पढ़ें:- 1 जुलाई से बदल जाएंगे आपके बैंक खाते से जुड़े ये 3 नियम, नहीं जानने पर होगा भारी नुकसानओपन ऑफर में देरी होने के मसले पर भी चर्चा हो सकती है 

मुमकिन है कि सेबी आज ओपन ऑफर में देरी होने के मसले पर भी चर्चा कर सकता है. सूत्रों ने बताया कि सेबी विचार कर रहा है कि अगर कोई ओपन ऑफर लाने में देरी करता है तो उसे शेयर होल्डर्स को 10 फीसदी ब्याज देना पड़ सकता है. 3 फरवरी के डिस्कशन पेपर में सेबी ने कहा था कि ऐसे कई मामले हैं जब इनवेस्टर की शिकायत, वैल्यूएशन में मतभेद, खरीदार कंपनी से पेमेंट मिलने में देरी जैसी कई वजहों के कारण ओपन ऑफर लाने में देर होती है.

टैक्स चोरी के मामलों पर भी चर्चा मुमकिन 
इसके अलावा इस बैठक में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और लिक्विडीटी ऑप्शनों में फर्जी ट्रेड के जरिए होने वाले कर चोरी के मामलों को कन्सेंट मैकेनिज्म के जरिए निपटान हेतु एक अलग विंड़ो बनाने पर भी चर्चा की जा सकती है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सेबी के इनफोर्स डिपार्टमेंट ने बड़े बैकलॉग निपटाने के लिए उपायों की भी सिफारिश की है जिनपर आज चर्चा हो सकती है. इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया कि यह स्पेशल विड़ो एक निश्चित समय के लिए खुल सकता है और सेबी किसी खास ट्रेड वॉल्यूम के लिए एक राशि का निर्धारण कर सकती है. इस तरह के मामले सेबी की हाइयस्ट पेडिंग केस लिस्ट में है.

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बता दें कि सेबी में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन से जुड़े करीब 30000 मामले और लिक्विड ऑप्शन में हुए ट्रेड से जुड़े करीब 15000 मामले पेंडिंग है. कुछ मामलों में एलसीटीजी और लिक्विड ऑप्शन के ट्रेडरों ने कनसेंट एप्लीकेशन भी दाखिल की है.


First published: June 25, 2020, 11:49 AM IST





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