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छोटे कारोबारियों के लिए नए बिजनेस का मौका, सरकार ने लॉन्च किया माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइसेस स्कीम


नई दिल्ली. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री (Minister for Food Processing Industries) हरसिमरत कौर बादल ने सोमवार को ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ (Atmanirbhar Bharat Abhiyan) के एक भाग के रूप में पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PM Formalization of Micro Food Processing Enterprises- PM FME) योजना की शुरुआत की. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि योजना से कुल 35,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 9 लाख कुशल और अर्ध-कुशल रोजगार सृजित होंगे और सूचना, प्रशिक्षण, बेहतर प्रदर्शन और औपचारिकता तक पहुंच के माध्यम से 8 लाख इकाइयों को लाभ होगा. इस अवसर पर योजना के दिशा-निर्देश जारी किए गए.

स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि गांवों में ग्रामीण उद्यमियों द्वारा निर्मित खाद्य उत्पादों में स्थानीय आबादी को भारतीय खाद्य उत्पादों की आपूर्ति करने की लंबी परम्‍परा रही है. माननीय प्रधानमंत्री ने 12 मई 2020 को राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में इन स्थानीय इकाइयों के महत्व और उनकी भूमिका पर जोर दिया. केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने कहा कि लगभग 25 लाख इकाइयों वाले असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र इस क्षेत्र में रोजगार में 74 प्रतिशत योगदान देते हैं. इनमें से लगभग 66 प्रतिशत इकाइयाँ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं और उनमें से करीब 80 प्रतिशत परिवार-आधारित उद्यम हैं जो ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सहायता करते हैं और शहरी क्षेत्रों में कम से कम पलायन करते करते हैं. ये इकाइयां मोटे तौर पर सूक्ष्म उद्यमों की श्रेणी में आती हैं.

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PM FME स्कीम का विवरणमौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने अखिल भारतीय स्‍तर पर एक ‘केन्‍द्र प्रायोजित पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोससिंग एंटरप्राइज (पीएम एफएमई) योजना’ की शुरूआत की जिसे 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा. इस योजना के तहत खर्च केन्‍द्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्‍तर और हिमालयी राज्यों के साथ 90:10 के अनुपात में, संघ शासित प्रदेशों के साथ 60:40 के अनुपात में और अन्य केन्‍द्र शासित प्रदेशों के लिए केन्‍द्र द्वारा 100 प्रतिशत साझा किया जाएगा.

यह योजना निवेश के प्रबन्‍ध, आम सेवाओं का लाभ उठाने और उत्पादों के विपणन के मामले में बड़े पैमाने पर लाभ उठाने के लिए एक जिला एक उत्‍पाद (One District One Product- ODODP) के दृष्टिकोण को अपनाती है. राज्य मौजूदा समूहों और कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए एक जिले के लिए खाद्य उत्पाद की पहचान करेंगे. ODODP खराब होने वाला उत्‍पाद या अनाज आधारित उत्पाद या एक जिले और उनके संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से उत्पादित खाद्य उत्पाद हो सकता है. ऐसे उत्पादों की सूची में आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, कीनू, भुजिया, पेठा, पापड़, अचार, बाजरा आधारित उत्पाद, मछली पालन, मुर्गी पालन, मांस के साथ-साथ पशु चारा भी शामिल है. ओडीओपी उत्पादों का उत्पादन करने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी.

10 लाख रुपए तक मिलेगा क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी लाभ
अपनी इकाई के उन्नयन की इच्छुक मौजूदा व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां पात्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी (credit-linked capital subsidy) का लाभ उठा सकती हैं जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए प्रति इकाई है. परियोजना शुरू करने के लिए आवंटित पूंजी 40,000 रुपये प्रति स्‍व सहायता समूह सदस्य कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों की खरीद के लिए प्रदान की जाएगी. एफपीओ / एसएचजी / निर्माता सहकारी समितियों को मूल्य श्रृंखला के साथ पूंजी निवेश के लिए 35 प्रतिशत का क्रेडिट लिंक्ड अनुदान प्रदान किया जाएगा.

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समूह में सूक्ष्‍म इकाइयों के उपयोग के लिए एफपीओ / एसएचजी / सहकारी समितियों या राज्य के स्वामित्व वाली एजेंसियों या निजी उद्यम के माध्यम से सामान्य प्रोसेसिंग सुविधा, प्रयोगशाला, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और ऊष्मायन केन्‍द्र सहित सामान्‍य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान के जरिये सहायता प्रदान की जाएगी. राज्य अथवा क्षेत्रीय स्तर पर 50% अनुदान के साथ सूक्ष्म इकाइयों और समूहों के लिए ब्रांड विकसित करने के लिए विपणन और ब्रांडिंग के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे समूह में बड़ी संख्या में सूक्ष्म इकाइयों को लाभ होगा.

TOP फसलों से लेकर खराब होने वाले फलों और सब्जियों तक ​​ऑपरेशन ग्रीन्स का विस्तार
एमओएफपीआई द्वारा कार्यान्वित की जा रही ऑपरेशन ग्रीन्स योजना का टमाटर, प्याज और आलू (टीओपी) फसलों से लेकर अन्य अधिसूचित बागवानी फसलों तक विस्‍तार कर दिया गया है ताकि उत्पादन क्षेत्र से प्रमुख उपभोग केन्‍द्रों तक उनके परिवहन और अधिशेष उत्‍पादन क्षेत्र से भंडारण के लिए सब्सिडी प्रदान करनेकी जा सके. हस्तक्षेप का उद्देश्य फल और सब्जियों के उत्पादकों को लॉकडाउन के कारण कम बिक्री से बचाना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है.





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