Home India News जानिए उस दिलेर वैज्ञानिक को, जो वायरस का शिकार करता है

जानिए उस दिलेर वैज्ञानिक को, जो वायरस का शिकार करता है


संक्रामक बीमारियों के जानकार पीटर डेसजैक खतरनाक पहाड़ियों और गुफाओं में मिलने वाले जीव-जंतुओं की तलाश में (virus hunter Peter Daszak) रहते हैं. इनका मकसद है विषाणुओं की पहचान करना ताकि महामारी के आने से पहले ही उसपर चेतावनी (warning before pandemic arrives) मिल सके.

चीन के वुहान से दिसंबर में फैले वायरस से अब तक 89 लाख से ज्यादा बड़ी आबादी प्रभावित है. बीच-बीच में खाने की अजीबोगरीब आदतों के कारण चीन पर आरोप लगता रहा है कि उनके चमगादड़ या पैंगोलिन खाने के कारण वायरस इंसानों में आ गए. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है. इस सबके बीच एक वैज्ञानिक वायरसों को खोजने का काम कर रहा है. अमेरिकी वैज्ञानिक पीटर डेसजैक का मानना है कि चमगादड़ों में हजारों तरह के वायरस होते हैं. कोरोना भी उनमें से एक है. ये देश-देश जाकर ऐसे इलाकों में चमगादड़ों या दूसरे जंतुओं को खोजते हैं, जिन्हें लोग खाते हैं. इसके बाद इनमें वायरस की पड़ताल की जाती है. पीटर का मानना है कि इससे ये समझने में मदद मिल सकती है कि क्या हमपर फिर से कोरोना या ऐसे ही किसी खतरनाक वायरस का हमला होने वाला है.

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कौन है ये एक्सपर्टवे एक वायरस हंटर हैं जो जगह-जगह जाकर चमगादड़ों में मिलने वाले वायरस पर काम कर रहे हैं. एक संस्था इकोहेल्थ अलायंस के तहत 10 सालों से इसपर काम करे रहे पीटर अबतक 20 देशों में सैंपल इकट्ठा करने जा चुके हैं. पीटर खुद बताते हैं कि उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर कोरोना वायरस फैमिली के 15 हजार से ज्यादा नमूने जमा किए, जिनमें से 500 सैंपल न्यू कोरोना वायरस से जुड़े पाए गए. माना जा रहा है कि साल 2013 में वुहान की एक गुफा से मिला सैंपल कोविड-19 से ठीक पहले का वायरस रहा होगा.

पीटर डेसजैक कोरोना वायरस फैमिली के 15 हजार से ज्यादा नमूने जमा कर चुके हैं

वाइरस हंटर बतौर काम करने वाले पीटर अकेले शख्स नहीं हैं, बल्कि उन्हें कई संस्थाओं का सहयोग है, जो ये पूर्वानुमान लगाने की कोशिश करती हैं कि भविष्य में कौन सा वायरस इंसानों पर हमला बोल सकता है. इसमें यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया, स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन, वाइल्डलाइफ सोसायटी जैसी संस्थाएं शामिल हैं. सिर्फ चमगादड़ों से फैलने वाले वायरस पर शोध के लिए एशिया और अफ्रीका में इनके 60 लैब काम कर रहे हैं.

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चमगादड़ों में इंसानों के लिए खतरनाक होने वाले वायरस की खोज करने के लिए पीटर ने चीन के युन्नान (Yunnan) प्रांत पर फोकस किया. ये इलाका चूने पत्थर वाली पहाड़ियों से घिरा होने की वजह से यहां काफी चमगादड़ पाए जाते हैं. वैज्ञानिक यहां से चमगादड़ों के जालों, थूक और खून समेत कई तरह के नमूने एकत्रित करते हैं. पीटर बताते हैं कि चीन से सार्स बीमारी फैलने के बाद वैज्ञानिकों का इस जगह पर ध्यान गया लेकिन अब दिख रहा है कि चमगादड़ों में सैकड़ों ऐसे वायरस होते हैं जो खतरनाक हो सकते हैं.

साल 2013 में वुहान की एक गुफा से मिला सैंपल कोविड-19 से ठीक पहले का वायरस माना जा रहा है

चीन के युन्नान प्रांत के एक शहर Jinning में काम के दौरान वहां के लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया. जांच के नतीजे चौंकाने वाले रहे. पीटर की टीम ने देखा कि वहां रहने वाले लोगों में 3 प्रतिशत के शरीर में वे सारी एंटीबॉडीज थीं, जो सिर्फ चमगादड़ों में होती हैं. यानी वे पहले ही वायरस से एक्सपोज हो चुके हैं और उनका शरीर इससे होने वाली बीमारियों के लिए इम्यून हो चुका है. इसके बाद पीटर ये भी कह रहे हैं कि कोरोना के इलाज में बैट की एंटीबॉडी से भी प्रयोग हो सकता है. वैसे वायरल अटैक की वजह से अब तक इसपर काम शुरू नहीं हुआ है.

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बनाई विषाणुओं की लाइब्रेरी
पीटर और टीम सबसे पहले सैंपल लेते हैं, उसे लिक्विड नाइट्रोजन में पैक करते हैं और फिर उनकी जांच के लिए लैब में भेज देते हैं. लेकिन काम यहीं खत्म नहीं होता. इसके बाद आता है सैंपल के नतीजों को एक जगह जमा करने का काम ताकि दवा या टीका तैयार करने वाले वैज्ञानिकों को प्री-क्लिनिकल रिसर्च में मदद मिल सके. अगर वायरस नया है तो ये जांचने की कोशिश की जाती है कि कितने दिनों में वो इंसानों पर हमला कर सकता है. अब तक न्यूमोनिया पैदा करने वाले आधे से भी कम वायरसों की पहचान हो सकी है इसलिए वायरस हंटर का काम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

इनकी वायरसों पर बनी लाइब्रेरी प्री-क्लिनिकल रिसर्च में मदद करती है (Photo-pixabay)

क्या हो सकता है इलाज?
कोरोना के शुरुआती मामले आने के बाद Wuhan Institute of Virology ने तुरंत इस लाइब्रेरी के डाटाबेस को खंगाला. यहीं पता चला कि युन्नान में साल 2013 में ही ये वायरस देखा जा चुका है. दोनों वायरसों में 96.2% समानताएं दिखीं. वायरस का ओरिजिन पता लगाने पर टीके की खोज आसान हो जाती है. अब पीटर का दावा है कि चमगादड़ों के शरीर में पाए जाने वाली एंटीबॉडी से कोरोना वायरस का इलाज हो सकेगा. Duke-NUS में वायरोलॉजिस्ट वैंग लिंफा भी इससे सहमत हैं. उनके अनुसार चमगादड़ों से जो खून के नमूने लिए गए, उनमें काफी मात्रा में एंटीबॉडी दिखी. ये जाहिर तौर पर कोरोना वायरस से एक्सपोज होने पर बनी होंगी. इसके आधार पर कोविड-19 के लिए टीका तैयार हो सकता है.

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साथ ही वैज्ञानिक चमगादड़ों के जरिए ये समझने की भी कोशिश कर रहे हैं कि क्या निकट भविष्य में कोरोना जैसी कोई महामारी दोबारा हमला कर सकती है! इससे बचाव के लिए भी कई तरह की मुहिम चलाई जा रही है. जैसे जिन इलाकों में चमगादड़ ज्यादा होते हैं, आबादी को वहां से दूर करने की कोशिश करना. इसी के तहत केन्या में एक मुहिम छेड़ी गई, जिसमें लोगों को बैट से दूर रहने की सलाह दी गई. चीन में भी मांसाहार खाने पर रोक लगाने की लगातार कोशिश हो रही है. चीन में डॉग-मीट पर पांच सालों के लिए लगा बैन एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.





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