Home World News जानिए फैक्ट: नेपाल को भारत में मिलाने का प्रस्ताव नेहरू ने ठुकराया...

जानिए फैक्ट: नेपाल को भारत में मिलाने का प्रस्ताव नेहरू ने ठुकराया था?


भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India-China Face-Off) के साथ ही नए नक्शे में भारतीय स्थानों पर दावा करने से नेपाल (Nepal New Map) के साथ भी खिंचाव के हालात हैं. ऐसे में, भारतीय जनता पार्टी का यह आरोप, कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेपाल के भारत में विलय (Nepal Merger into India) का ऑफर ठुकरा दिया था, काफी चर्चा में है. लेकिन क्या यह आरोप सही है? इतिहास, राजनीति और भारत नेपाल संबंधों को बारीकी से जानने वाले विशेषज्ञ इस बारे में क्या कहते हैं?

अस्ल में, यह मुद्दा तब सामने आया जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट में दावा किया कि नेहरू ने नेपाल को भारत में मिलाने का मौका गंवा दिया था. इस दावे का सच समझने से पहले ज़रूरी है कि इस मुद्दे को पहले समझा जाए.

नेपाल और उसकी आज़ादी पर क्या सोचते थे नेहरू?
अव्वल तो में कोई भी अपनी आज़ादी और पहचान छोड़ना नहीं चाहता था. वहीं नेहरू मानते थे कि नेपाल के साथ करीबी संबंध रखना ज़रूरी हैं. इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज़ एंड एनालिसिस यानी IDSA के सदस्य और जेएनयू में प्रोफेसर एसडी मुनि के हवाले से क्विंट की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. मुनि ने यह भी कहा :

ने​हरू जानते थे कि उस समय अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों की राजनीति किस तरह चीन के खिलाफ थी और गोवा के विलय से भारत के खिलाफ कितना विरोध था इसलिए तकनीकी कारणों से नेपाल को भारत में मिलाने को नेहरू ने संभव नहीं माना था लेकिन नज़दीकी रिश्तों की बात 1950 की संधि में ज़रूर थी, जो राणा के समय में हुई थी.

ये भी पढ़ें :- नेपाल-चीन के बीच है खास सड़क, भारत के लिए बन सकती है परेशानी

india nepal relations, india nepal tension, india china border dispute, india china border tension, india nepla history, भारत नेपाल संबंध, भारत नेपाल तनाव, भारत चीन सीमा विवाद, भारत चीन सीमा तनाव, भारत नेपाल इतिहास

क्या थी 1950 की भारत-नेपाल संधि?

उस समय भारत के प्रतिनिधि चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री मोहन शमशेर जंग बहादुर राणा के बीच शांति और मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस संधि को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को स्पष्ट करने वाला दस्तावेज़ माना गया. तबसे यानी राणा के समय से अब तक नेपाल में कई राजनीतिक बदलाव हो चुके हैं और अब भारत के प्रति नेपाल की विदेश नीति भी बदली है.

IDSA के लेख में उल्लेख है कि जब नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्टों का विरोध झेलना पड़ा तो नेपाल के राजा महेंद्र को एहसास हुआ कि भारत से चिपके रहना दूरगामी नहीं होगा इसलिए भारत के साथ कुछ दूरियां और ‘अन्य देशों’ के साथ नज़दीकियां नेपाल ने बढ़ाईं… तो नेहरू पर लगे इल्ज़ाम और उसका सच जानने के लिए अब उन नामों के बारे में जानना चाहिए जो इस मामले में प्रमुख भूमिकाओं में थे.

राणा : 1846 से 1951 के बीच नेपाल में निरंकुशता का शासन चलाकर अलग थलग रहने की नीति रखने वाला वंश.
राजा त्रिभुवन : नेपाल के राजा, जो 1951 में नेपाल लौटे और राणा वंश का शासन खत्म किया. राजा त्रिभुवन ने नेपाल में संवैधानिक राजवंश तंत्र के तहत लोकतंत्र बहाल किया.
नेपाली कांग्रेस : नेपाली नेशनल कांग्रेस और नेपाली डेमोक्रेटिक पार्टी के विलय के बाद 1946 में यह राजनीतिक पार्टी बनी थी.

क्या थे राणा और त्रिभुवन के बीच समीकरण?
गिने चुने लोगों यानी राणाओं के शासन और राजा त्रिभुवन के उदय के समय में नेपाल में सियासी उठापटक मची हुई थी, जिसमें सैन्य तरीके भी शामिल थे. त्रिभुवन को नेपाली कांग्रेस के साथ ही उन असंतुष्ट राणाओं का भी समर्थन मिला, जो लोकतंत्र के पक्ष में थे. वहीं, 1950 में नेपाली कांग्रेस ने राणाओं के तख्तापलट के लिए इन्किलाब की घोषणा की.

india nepal relations, india nepal tension, india china border dispute, india china border tension, india nepla history, भारत नेपाल संबंध, भारत नेपाल तनाव, भारत चीन सीमा विवाद, भारत चीन सीमा तनाव, भारत नेपाल इतिहास

नेपाली लेखक अ​मीश राज मुल्मी के लेख के मुताबिक यह इन्किलाब लाना आसान नहीं था. इसके बावजूद राजा त्रिभुवन और कांग्रेस के ​संयुक्त प्रयासों से यह मुमकिन हुआ. 1951 में त्रिभुवन नेपाल के प्रमुख बने और फिर उन्होंने अंतरिम संविधान के तहत सीमित लोकतंत्र की बहाली की.

नेहरू पर इल्ज़ाम अफ़वाह है : मुनि का दावा
नेपाल के भारत में विलय के बारे में नेहरू पर लगाया गया इल्ज़ाम अफवाहों पर आधारित है, जिसका कोई सबूत नहीं है. प्रोफेसर मुनि इस बारे में बताते हैं कि एक तो त्रिभुवन ने जब संघीय ढांचे का विरोध किया था तब भी किसी विलय की बात नहीं कही थी. दूसरे, भारत ​के विदेश मंत्रालय के पास ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं है, जो यह साबित कर सके कि नेहरू के पास ऐसा प्रस्ताव आया था. ये महज़ अफवाहें रहीं.

प्रोफेसर मुनि के साथ ही, क्विंट की दूसरी रिपोर्ट कहती है कि त्रिभुवन भारत के साथ बेहद करीबी रिश्ते रखने के पक्ष में थे, यह सही है लेकिन दूसरी तरफ, नेहरू चाहते थे कि नेपाल आज़ाद रहे क्योंकि विलय जैसे किसी कदम से फिर अंग्रेज़ों और अमेरिकियों की दखलंदाज़ी से समस्याएं खड़ी हो सकती थीं.

तो कैसे फैली ये अफ़वाह?
शोधगंगा में प्रकाशित नेपाल और भूटान के प्रति भारत की विदेश नीति संबंधी एक लेख में कहा गया है कि राणाओं के शासन को खत्म करने के बाद त्रिभुवन नेपाल को भारत में विलय करना चाहते थे, लेकिन नेहरू ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. लेकिन प्रोफेसर मुनि स्पष्ट करते हैं कि त्रिभुवन की तरफ ऐसा कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं था, बल्कि ऐसा केवल उनका विचार हो सकता था.

india nepal relations, india nepal tension, india china border dispute, india china border tension, india nepla history, भारत नेपाल संबंध, भारत नेपाल तनाव, भारत चीन सीमा विवाद, भारत चीन सीमा तनाव, भारत नेपाल इतिहास

सरदार पटेल और पंडित नेहरू का यादगार चित्र.

क्या सरदार पटेल ने दिया था​ विलय का प्रस्ताव?
मुनि ही नहीं बल्कि नेपाल के भारत में पूर्व राजदूत लोकराज बरल ने भी सुब्रमण्यम स्वामी के दावे को महज़ अफ़वाह बताया. बरल के मुताबिक रिपोर्ट में कहा ​गया है कि ‘यह अफवाह थी. मुझे नहीं लगता कि राणा नेपाल का भारत में विलय चाहते थे. हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है. हां त्रिभुवन ज़रूर भारत से नज़दीकी के पक्षधर थे, लेकिन इस तरह के दावे तो अफ़वाहों पर ही आधारित हैं.’ लेकिन बरल ने एक सिरा और छेड़ा है.

ये भी पढें:-

विदेशी जानकार क्या कहते हैं चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के कुटिल दिमाग के बारे में

अरुणाचल तक पहुंची चीन की रेल लाइन, भारत के लिए क्यों है चिंता की वजह?

बरल की मानें तो वो सरदार पटेल थे, जिन्होंने नेहरू के सामने नेपाल को भारत में मिला लेने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन नेहरू ने इस सुझाव को खारिज कर दिया था. हालांकि इस दावे के भी कोई सबूत पेश किए जाने का कोई ज़िक्र नहीं है. साथ ही, दिल्ली बेस्ड नेपाली पत्रकार आकांक्षा शाह भी कहती हैं कि नेपाल लंबे समय से स्वतंत्र देश रहा है और स्वामी के दावे के पीछे कोई औपचारिक दस्तावेज़ नहीं है.





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments