Home India News जानें उन कृष्णा भारत को, जिन्होंने बनाया सबसे हिट गूगल न्यूज

जानें उन कृष्णा भारत को, जिन्होंने बनाया सबसे हिट गूगल न्यूज


बेंगलुरू के कृष्णा भारत ने 9/11 के बाद गूगल न्यूज का आविष्कार किया

बेंगलुरू के कृष्णा भारत ने 9/11 के बाद गूगल न्यूज का आविष्कार (Krishna Bharat is the creator of google news) किया ताकि लोगों को किसी खास खबर की सारी अपडेट एक जगह मिल सके.

दुनियाभर में IT सेक्टर पर इन दिनों भारतीयों का दबदबा है. चाहे वो गूगल के सुंदर पिचाई हों या माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला. इसी कड़ी में एक और भी नाम है- कृष्णा भारत. कर्नाटक का ये शख्स उतना सुर्खियों में नहीं रहा लेकिन उसके बनाए गूगल न्यूज से लगभग सभी परिचित हैं. देश-दुनिया की सारी खबरें यहां एक क्लिक पर मिल जाती हैं. लेकिन आज से लगभग दो दशक पहले ऐसा नहीं था. तब किसी घटना के होने पर टेलीफोन और इंतजार ही सहारा था. ऐसे ही हालातों से खुद कृष्णा भी 9/11 के वक्त गुजरे और तैयार हुई गूगल न्यूज की राह.

साल 2001 के सितंबर में जब इस्लामी आतंकियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया, तब कृष्णा किसी सेमिनार में हिस्सा लेने के लिए लुसिआना गए हुए थे. घटना की सूचना उन्हें होटल के कमरे में मिली. सारी हवाई यात्राएं रद्द हो चुकी थीं और कृष्णा समेत सारे लोग अपने परिवार के पास लौटना चाहते थे. ट्रेड सेंटर पर हुआ हमला सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान पर्ल हार्बर हमले के बाद सबसे बड़ा हमला माना जा रहा था. सारे वैज्ञानिक वाकये की पूरी जानकारी चाहते थे लेकिन बातें टुकड़ों-टुकड़ों में उन तक पहुंच रही थीं. ऐसे में होटल के कमरे में बैठे हुए कृष्णा टेलीविजन चैनल बदलते हुए सोचने लगे कि सारी जानकारियां एक ही जगह जमा हो सकें तो किसी घटना से परेशान लोगों को कितनी मदद मिल सकेगी.

ट्रेड सेंटर पर हुआ हमला सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान पर्ल हार्बर हमले के बाद सबसे बड़ा हमला था

ये शुरुआत थी. कृष्णा के दिमाग में ऐसा सर्च इंजन तैयार करने की बात आई, जहां इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को सारी जानकारी एक जगह मिले. उन्हें कहीं भटकना न पड़े. लिहाजा हवाई सेवाएं रेज्यूम होने के बाद वे लौटे और रिसर्च शुरू की. तब गूगल ने अपने इंजीनियरों को दफ्तर के काम के अलावा 20 फीसदी समय अपने निजी रिसर्च काम में लगाने की छूट दी हुई थी. इसी वर्क कल्चर के तहत कृष्णा ने शोध किया और अपनी खोज और उससे जुड़ी प्रोग्रेस को गूगल के बुलेटिन बोर्ड पर डालना शुरू किया ताकि स्टाफ के लोगों को जानकारी मिल सके.ये भी पढ़ें: क्या नेपाल के बाद अब भूटान भी भारत से बढ़ा रहा है दूरी?

तीन ही महीने के भीतर कृष्णा के इस प्रयोग की चर्चा गूगल के भीतर होने लगी और उन्हें पूरी तरह से इसी पर काम करने के लिए कह दिया गया. इस तरह से गूगल न्यूज हमारे सामने आ सका. साल 2014 में ही गूगल न्यूज दुनिया की 70 भाषाओं में 50 हजार से अधिक खबरों के साथ आने लगा था.

तीन ही महीने के भीतर कृष्णा के प्रयोग की चर्चा गूगल के भीतर होने लगी

वैसे 7 जनवरी 1970 को कर्नाटक में जन्मे कृष्णा ने गूगल के लिए माउंटेन व्यू अमेरिका में रिसर्च साइंटिस्ट के काम से शुरुआत की थी. बेंगलुरू से ही स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद जॉर्जिया से ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन पर पीएचडी की. इसके बाद कृष्णा ने साल 1999 से गूगल में काम शुरू किया. इसी दौरान उन्होंने गूगल न्यूज की शुरुआत की. 15 सालों से ज्यादा वक्त के बाद वे इसे छोड़कर एक मशीन लर्निग सॉफ्टवेयर स्टार्टअप के फाउंडिंग एडवाइजर हो गए. साल 2019 में उन्होंने शोधकर्ता के तौर पर दोबारा गूगल जॉइन कर लिया.

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मजे की बात ये है कि जिस साइट को कृष्णा ने खुद तैयार किया और इतनी लोकप्रियता मिली, उसी साइट को अफवाहें फैलाने की वजह से एक वक्त पर उन्होंने शर्मनाक तक कह दिया था. साल 2017 में लास वेगास में हुई शूटिंग और 58 लोगों की हत्या पर गूगल न्यूज में फेक न्यूज फैलाई गई थी. इसमें गलत शख्स को शूटर प्रचारित कर दिया गया. इसपर गुस्साए कृष्णा ने लिखा था- इस सेक्शन को टॉप स्टोरीज कहते हैं, न कि टॉप अफवाहें.

इसके बाद गूगल न्यूज ने अपने नियम-कायदे और सख्त किए ताकि फेक न्यूज फैलाने पर रोक लग सके.


First published: June 26, 2020, 6:06 PM IST





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