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टीम इंडिया के इस खिलाड़ी को सेना, पुलिस में नहीं मिली नौकरी, पिता थे कोयला खदान में मजदूर!


उमेश यादव के संघर्ष की कहानी

टीम इंडिया के तेज गेंदबाज उमेश यादव (Umesh Yadav) की कहानी सच में प्रेरणादायी है.

नई दिल्ली. टीम इंडिया के ज्यादातर खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है. भारतीय कप्तान विराट कोहली हों, उपकप्तान रोहित शर्मा हों या फिर एमएस धोनी, सभी बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे और बचपन में उन्होंने कई कठिनाइओं का सामना किया है. कुछ ऐसी ही कहानी तेज गेंदबाज उमेश यादव (Umesh Yadav) की भी है. उमेश यादव ने भी बेहद गरीबी के दिन देखे हैं. विदर्भ में जन्मे उमेश यादव के पिता एक कोयला खदान में काम करने वाले मजदूर थे. बड़ी मुश्किल से वो घर का खर्च चलाते थे. आइए आपको बताते हैं उमेश यादव के मुश्किल बचपन की कहानी.

हर जगह से उमेश यादव को सुननी पड़ी ना
उमेश यादव (Umesh Yadav) पढ़ने में अच्छे नहीं थे और 12वीं पास करने के बाद उन्होंने नौकरी करने का मन बनाया. उमेश यादव का सपना आर्मी में भर्ती होना था लेकिन टेस्ट में वो फेल हो गए. आर्मी में नौकरी नहीं मिलने से निराश उमेश यादव ने पुलिस में भर्ती होने की कोशिश की लेकिन वहां भी वो नाकाम रहे. उमेश यादव सिर्फ 2 नंबर से फेल हो गए. इसके बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें क्या करना चाहिए.

उमेश यादव थे जबर्दस्त बॉलरउमेश यादव (Umesh Yadav) क्रिकेट के मैदान पर अपनी तूफानी गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे. वो टेनिस बॉल से बहुत तेज गेंदबाजी करते थे. एक टूर्नामेंट में उन्होंने 10 हजार रुपये का मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीता था. क्रिकेट के दम पर उन्होंने कॉलेज टीम में एंट्री चाही लेकिन उन्हें कहीं एडमिशन नहीं मिला.

ऐसे बदली उमेश की किस्मत
हर जगह से ना सुनने के बाद उमेश यादव (Umesh Yadav) विदर्भ जिमखाना गए, जहां उन्हें एंट्री मिली. उमेश यादव के पास स्पाइक्स नहीं थे और उन्हें रबड़ के स्टड्स वाले जूते गेंदबाजी के लिए दिये गए. पहले ही मैच में उमेश यादव ने 10 ओवर में 37 रन देकर 3 विकेट झटके. उमेश यादव ने जल्द ही विदर्भ में अपना नाम बना लिया. दरअसल उमेश यादव की यॉर्कर जबर्दस्त थी और वो बल्लेबाजों को अपनी रफ्तार से पूरी तरह छका देते थे.

विदर्भ रणजी टीम के कप्तान प्रीतम गांधे की नजर उमेश यादव पर पड़ी. गांधे ने उमेश यादव को एयर इंडिया के लिए टी20 टूर्नामेंट खेलने का मौका दिलाया. वो टूर्नामेंट खेलने के बाद उमेश यादव को विदर्भ की 15 सदस्यीय टीम में जगह मिली और उन्होंने मध्य प्रदेश के खिलाफ अपना डेब्यू किया. उमेश ने पहली पारी में 72 रन देकर 4 विकेट झटके. साल 2010 में उमेश यादव को दिल्ली डेयरडेविल्स ने खरीदा और वहां से उनकी किस्मत ही बदल गई. उमेश यादव को टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला और नवंबर 2011 में वो भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले विदर्भ के पहले खिलाड़ी बने.

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उमेश यादव का करियर
आज उमेश यादव (Umesh Yadav) दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं. यादव ने भारत के लिए 46 टेस्ट में 144 विकेट झटके हैं. वहीं वनडे में उनके नाम 75 वनडे में 106 विकेट हैं. साफ है एक कोयला खदान के मजदूर के बेटे ने कभी नहीं सोचा होगा कि वो एक दिन देश का इतना बड़ा गेंदबाज बनेगा.

 

First published: June 29, 2020, 10:23 PM IST





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