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डीज़ल के दाम बढ़ने से आम आदमी को लगेगा झटका! महंगी हो सकती हैं रोजमर्रा की चीज़ें


डीजल की कीमतों में रोज हो रही बढ़ाेतरी से परेशान ट्रक ऑपरेटर्स जल्‍द माल ढुलाई भाड़ा बढ़ा सकते हैं.

ट्रक परिचालकों का कहना है कि डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में लगातार बढ़ोतरी, भारी-भरकम टोल टैक्‍स, सैनिटाइजेशन लागत के कारण अतिरिक्‍त बोझ पड़ रहा है. ऐसे में माल ढुलाई भाड़े (Freight Charges) में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके.

नई दिल्‍ली. पेट्रोल और डीजल की कीमतें (Petrol-Diesel Price) पिछले 17 दिन से लगातार बढ़ रही हैं. इससे पेट्रोल के दाम में 8.50 रुपये और डीजल की कीमत में 9.77 रुपये प्रति लीटर की जबरदस्‍त वृद्धि हो गई है. देशभर कई ट्रक ऑपरेटर्स (Truck Operators) और उनके संगठन डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण उनके काम पर पड़ रहे असर के बारे में चर्चा कर रहे थे. आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने हाल में बताया था कि ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण देशभर में 65 फीसदी ट्रक बिना किसी काम के बेकार खड़े हैं. अब संकेत मिले हैं कि ट्रक ऑपरेटर्स जल्‍द माल ढुलाई (Freight Charges) बढ़ाने का फैसला ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो इसका असर महंगाई (Inflation) के तौर पर दिखाई देगा.

परिचालन लागत में 60-65 फीसदी हो गई है वृद्धि
ट्रक और छोटे माल ढुलाई वाहनों के मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में रोज हो रही वृद्धि के कारण उन्‍हें परिचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. पिछले 17 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में हुई भारी वृद्धि के कारण माल ढुलाई की लागत भी निकाला मुश्किल हो गया है. दरअसल, ट्रक परिचालन की लागत 60 से 65 फीसदी प्रति किलोमीटर बढ़ गई है. वहीं, मौजूदा माहौल में मांग कम है और ट्रक इसके अनुपात में बहुत ज्‍यादा हैं. ऐसे में बड़ी संख्‍या में ट्रक बिना किसी काम के खड़े हैं.

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ट्रक परिचालकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण टायर और स्‍पेयर पार्ट्स भी महंगे हो गए हैं. इसके अलावा ट्रक परिचालकों पर भारी-भरकम टोल टैक्‍स, सैनिटाइजेशन लागत के कारण अतिरिक्‍त बोझ पड़ रहा है. ऐसे में माल ढुलाई भाड़े में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके. वहीं, सार्वजनिक परिवहन परिचालकों का कहना है कि ईंधन के दामों में वृद्धि से यात्री किराये में भी वृद्धि की जा सकती है. अगा माल ढुलाई में 10 फीसदी बढ़ोतरी की गई तो रोजमर्रा के इस्‍तेमाल की वस्‍तुओं की कीमतों में भी उछाल देखने को मिलेगा.

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फल, सब्‍जी, एफएमसीजी वस्‍तुएं हो सकती हैं महंगी
माल ढुलाई बढ़ने से फल-सब्जियों की कीमत में उछाल आना तय है. वहीं, एफएमसीजी वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है. डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई में इजाफे का असर एकसाथ पूरे देश पर दिखाई देगा. इससे एफएमसीजी कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और वे कीमतों में बढ़ोतरी को मजबूर हो जाएंगी. फल और सब्जियों की कीमतों में ढुलाई का हिस्‍सा दूसरी वस्तुओं के मुकाबले ज्यादा होता है. दरअसल, अलग-अलग किसानों के पास कम मात्रा में फल-सब्जी होती हैं. उन्हें अपने उत्पाद मंडी तक पहुंचाने में बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ता है. फलों के मामले में हालात कुछ ज्‍यादा ही अलग हैं. फलों को अलग-अलग राज्‍यों से पहले दिल्‍ली लाया जाता है. इसके बाद उनका पूरे देश में वितरण होता है. ऐसे में माल ढुलाई बढ़ने पर फलों की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है.


First published: June 23, 2020, 4:10 PM IST





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