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तीन दशक से श्रीनगर में बंद हैं सिनेमाघर, अब पहला मल्टीप्लेक्स खोलने की तैयारी


श्रीनगर में कई दशक बाद सिनेमा फिर वापस लौट सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

श्रीनगर में 1990 में सभी सिनेमा हॉल (Cinema Hall) को बंद कर दिया गया था. कहा जा रहा है कि अगले मार्च तक यहां पर फिल्मों का प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा.

नई दिल्ली. श्रीनगर में में तीन दशक बाद एक बार फिर से सिनेमा हॉल (Cinema Hall) खुल सकता है. घाटी में 1990 में सभी सिनेमा हॉल को बंद कर दिया गया था. अब एक सिनेमा हॉल को मल्टीप्लेक्स (Multiplex) बनाने की छूट मिल गई है. कहा जा रहा है कि अगले मार्च तक यहां पर फिल्मों का प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा. श्रीनगर तीस साल पहले बंद हुए ब्रॉडवे सिनेमा हॉल के मालिक विजय धर ने द हिंदू अखबार को बताया है कि उन्हें सरकार की तरफ से मल्टीप्लेक्स की शुरुआत करने की अनुमति (No Objection Certificate) हासिल हो गई है.

क्या बोले थे सत्यपाल मलिक
द हिंदू पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक मल्टीप्लेक्स खोलने का ये निर्णय युवाओं के मनोरंजन के मद्देनजर लिया गया है. विजय धर ने कहा है-राज्य के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक ने एक बार मुझसे कहा था कि श्रीनगर में युवाओं के मनोरंजन के साधनों की कमी है. यहां सिनेमा या फिर अन्य एंटरटेनमेंट सेंटर्स की बेहद कमी है.

संगीत कार्यक्रम में पहुंचे 9000 लोगविजय धर श्रीनगर में ही रहते हैं और डी.पी. धर के बेटे हैं. गौरतलब है कि बांग्लादेश को पाकिस्तान के हाथों से आजाद कराने के लिए भारत के हस्तक्षेप में डी.पी. धर की बड़ी भूमिका थी. विजय धर के मुताबिक नब्बे के दशक में घाटी में आतंकवाद की वजह से सिनेमा हॉल बंद करने पड़े थे. सुरक्षा कारण इसकी सबसे मुख्य वजह थे. विजय कहते हैं-1990 के बाद से अब तक हमने श्रीनगर के युवाओं को आकर्षित करने के लिए कम प्रयास किए हैं. कुछ समय पहले हमने दिल्ली पब्लिक स्कूल में एक संगीत का कार्यक्रम करवाया था. आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीनगर जैसी जगह में करीब 9 हजार लोग इकट्ठा हुए थे.

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सुरक्षा इंतजाम अब भी मुद्दा
श्रीनगर के नीलम सिनेमा हॉल के मालिक अल्ताफ अहमद कहते हैं-हमने 1999 में एक बार फिर सिनेमा हॉल खोलने की शुरुआत की थी लेकिन सुरक्षा कारणों से ये महज डेढ़ साल के भीतर ही बंद करा दिए गए. उन्होंने कहा कि घाटी में भी सिनेमा के सामने वही चैलेंज है जो दूसरी जगहों पर है. यहां पर एक और कारण जुड़ता है और वो है सुरक्षा का.

गौरतलब है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर उसे संघशासित प्रदेश बना दिया था. साथ ही लद्दाख को अलग कर उसे भी संघशासित राज्य बना दिया गया था.


First published: June 23, 2020, 1:05 PM IST





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