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पाकिस्तान आतंक पर काबू पाने में नाकाम, FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा


एफएटीएफ ने एक बार फिर से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है (File Photo)

एफएटीएफ (FATF) के मुताबिक पाकिस्तान (Pakistan) लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba), जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) को धन उपलब्ध होने पर अंकुश लगाने में विफल रहा है.

नई दिल्ली. आतंकवाद को धन उपलब्ध (Terror Funding) होने पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) ने बुधवार को पाकिस्तान (Pakistan) को ‘ग्रे सूची’’ में रखने का फैसला लिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एफएटीएफ (FATF) के मुताबिक वह लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba), जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) को धन उपलब्ध होने पर अंकुश लगाने में विफल रहा है. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने अपनी तीसरी डिजिटल बैठक में यह फैसला किया. इस घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘‘एफएटीएफ ने अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक तक पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में रखने का निर्णय लिया है.’’

अधिकारी ने बताया कि एफएटीएफ को यह लगता है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को धन उपलब्ध होने पर अंकुश लगाने में विफल रहा, इसलिए यह फैसला लिया गया है. बता दें पाकिस्तान जून 2018 से ग्रे सूची में बना हुआ है. इससे पहले फरवरी 2020 और अक्टूबर 2019 में भी पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाला गया था. यही नहीं पाकिस्तान को एफएटीएफ ने कड़ी फटकार लगाते हुए आतंक पर काबू पाने के लिए चेतावनी दी थी. अक्टूबर 2019 में एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैक सूची में डालना चाहता था लेकिन चीन, तुर्की और मलेशिया जैसे देश पाकिस्तान के साथ आ गए और पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से बच गया.

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 ब्लैकलिस्ट होने पर पाकिस्तान की बढ़ेंगी मुश्किलेंबता दें यदि पाकिस्तान को अक्टूबर की समीक्षा के बाद ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता तो आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक, यूरोपीय संघ जैसे बहुपक्षीय कर्जदाता पाकिस्तान की ग्रेडिंग कम कर देते जिससे किसी भी देश से कर्ज़ लेने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता. जून 2018 से ग्रे लिस्ट में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 27 मुद्दों पर आतंक के खिलाफ कर्रवाई करने के लिए कहा था. सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान इनमें से 25 मुद्दों पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा. इसमें आतंकी संगठनों की ओर से चलाए जा रहे मदरसे, एनजीओ और दूसरी सेवाओं को दी जा रही मदद का मामला मुख्य है.

 

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 क्या है एफएटीएफ
G-7 देशों की पहल पर एफएटीएफ की स्थापना 1989 में हुई थी. ये एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. इस संगठन के सदस्यों की संख्या 37 है. भारत भी इस संगठन का सदस्य है. इसका मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने में नाकाम देशों की रेटिंग तैयार करना है. एफएटीएफ ऐसे देशों की दो लिस्ट तैयार करता है. पहली लिस्ट ग्रे और दूसरी ब्लैक होती है. ग्रे लिस्ट में शामिल होने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलने में मुश्किल होती है. वहीं, ब्लैक लिस्ट में आने वाले देशों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है. (भाषा के इनपुट सहित)


First published: June 24, 2020, 11:46 PM IST





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