Home India News प्रायोगिक आधार पर वकीलों को लोकल ट्रेन में सफर करने दें: हाईकोर्ट

प्रायोगिक आधार पर वकीलों को लोकल ट्रेन में सफर करने दें: हाईकोर्ट


पीठ ने कहा, इस व्यवस्था को प्रायोगिक आधार पर 18 सितंबर से सात अक्टूबर तक चलने दीजिए. (सांकेतिक फोटो)

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ (Bench) ने कहा कि जिन वकीलों (Advocates) को मामलों के संबंध में पेश होना है उन्हें उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (Registrar) को अनिवार्य रूप से इस बारे में लिखना चाहिए.

मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) और रेलवे (Railways) को निर्देश दिया कि 18 सितंबर से सात अक्टूबर तक मुंबई में “प्रायोगिक आधार” पर वकीलों (Advocates) को लोकल ट्रेन (Local Trains) में सफर करने दिया जाए जिससे वे उच्च न्यायालय में अदालत कक्ष में उपस्थित हो कर मामलों की सुनवाई में शरीक हो सकें. कोविड-19 (COVID-19) का प्रसार रोकने के लिये पश्चिम रेलवे (Western Railways) और मध्य रेलवे राज्य सरकार (State Government) द्वारा निर्दिष्ट आवश्यक सेवाओं के लिये ही चुनिंदा उपनगरीय रेल सेवाओं का संचालन कर रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ (Bench) ने कहा कि जिन वकीलों (Advocates) को मामलों के संबंध में पेश होना है उन्हें उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (Registrar) को अनिवार्य रूप से इस बारे में लिखना चाहिए. रजिस्ट्रार वकील के दावों की पुष्टि करने के बाद प्रमाण-पत्र (certificate) जारी करेगा जिसके आधार पर मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे वकील को खास तौर पर उस दिन के लिये पास या टिकट (Ticket) जारी करेंगे.

महाराष्ट्र, गोवा विधिज्ञ परिषद के पास संबंधित वकील के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होगा
पीठ ने वकीलों को यात्रा प्रमाण-पत्र के दुरुपयोग को लेकर चेताते हुए कहा कि ऐसा करते पाये जाने पर महाराष्ट्र और गोवा विधिज्ञ परिषद के पास संबंधित वकील के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होगा.पीठ ने कहा, “इस व्यवस्था को प्रायोगिक आधार पर 18 सितंबर से सात अक्टूबर तक चलने दीजिए. हम वकीलों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील हैं. अगर यह कारगर रहता है तो हम निचली अदालतों के बारे में भी सोचेंगे।”

अदालत में उपस्थिति होने की अनिवार्यता की स्थिति में इस्तेमाल की केंद्र-राज्य ने कही थी बात
अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें अनुरोध किया गया था कि वकीलों को अदालत पहुंचने के लिये उपनगरीय रेल नेटवर्क के इस्तेमाल की इजाजत दी जानी चाहिए.

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राज्य और केंद्र सरकार ने कहा था कि वकीलों को भौतिक रूप से अदालत में उपस्थिति होने की अनिवार्यता की स्थिति में उस खास दिन के लिये उन्हें रेल का इस्तेमाल करने देने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. इसके बाद अदालत का यह निर्देश आया.





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