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महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पत्र विवाद पर अमित शाह के बयान का शिवसेना ने किया स्वागत, जानें क्या है मामला


शिवसेना सांसद संजय राउत (PTI)

शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस तरह की अटकलों को खारिज कर दिया कि शाह शिवसेना को लेकर नरमी बरत रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कुछ राजनीतिक नहीं है. शाह ने जो बोला, वह संविधान के अनुरूप है.’’

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 18, 2020, 5:02 PM IST

मुंबई. शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) के इस बयान का स्वागत किया कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Kosari) राज्य में पूजा स्थलों को फिर से खोलने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को लिखे पत्र में बेहतर शब्द चुन सकते थे. राउत ने एक टीवी चैनल से बातचीत में यह भी कहा कि शाह के बयान के बाद शिवसेना ने इस मुद्दे को छोड़ दिया है.

कोश्यारी ने हाल ही में ठाकरे को राज्य में धर्मस्थलों को फिर से खोलने के लिए पत्र लिखा था और पूछा था कि क्या शिवसेना अध्यक्ष अचानक से धर्मनिरपेक्ष हो गये. इसके बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गये थे. शाह ने शनिवार को एक समाचार चैनल से कहा, ‘‘कोश्यारी बेहतर शब्द चुन सकते थे.’’

राज्यपाल का पत्र अनावश्यक विवाद था
इस पर राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शाह देश के गृह मंत्री हैं और जिम्मेदारी तथा सावधानी से बोलते हैं. उन्होंने कहा कि राज भवन और राज्यपाल का कार्यालय संवैधानिक संस्थाएं हैं और गृह मंत्रालय के कार्य क्षेत्र में आते हैं. शिवसेना नेता ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के जवाब के बाद राज्यपाल का पत्र अनावश्यक विवाद था और हमने इसे शुरू नहीं किया था. हम केंद्रीय गृह मंत्री के रुख से संतुष्ट हैं और हमारी नाराजगी की वजह समझने के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हैं.’’राउत ने इस तरह की अटकलों को खारिज कर दिया कि शाह शिवसेना को लेकर नरमी बरत रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कुछ राजनीतिक नहीं है. शाह ने जो बोला, वह संविधान के अनुरूप है.’’

क्या है मामला?
राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे को ‘हिंदुत्व का मजबूत समर्थक’ बताते हुए अपने पत्र में लिखा था कि उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि क्या सीएम को ‘पूजा के स्थानों के फिर से खोले जाने के कदम को स्थगित रखने के लिए कोई दैवीय आदेश मिल रहा है. या फिर आप खुद को ‘धर्मनिरपेक्ष’ बना चुके हैं. एक शब्द जिससे आप नफरत करते थे?’

कोश्यारी के इन शब्दों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ठाकरे ने एक दिन बाद कोश्यारी को जवाब दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें किसी से भी हिंदुत्व का पाठ सीखने की आवश्यकता नहीं है. (इनपुटः भाषा से)





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