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महाराष्ट्र सरकार ने चिकित्सा के लिए ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहनों को एम्बुलेंस का दर्जा दिया


इस दौरान ऑक्सीजन ले जाने वाले वाहनों को आपातकालीन सेवा पर और आपदा प्रबंधन ड्यूटी पर माना जाएगा (सांकेतिक फोटो)

केंद्र ने रविवार को महाराष्ट्र (Maharashtra), आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता और राज्य के अंदर तथा दूसरे राज्यों में ऑक्सीजन सिलेंडरों (Oxygen Cylinder) की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 14, 2020, 10:04 PM IST

नई दिल्ली. महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने आदेश दिया है कि चिकित्सा (Treatment) के उद्देश्य के लिए ऑक्सीजन (Oxygen) ले जाने की अनुमति वाले वाहनों को एम्बुलेंस (Ambulance) जैसा दर्जा दिया जायेगा. और इस आदेश की वैधता 1 साल के लिए केवल ऑक्सीजन ले जाने के लिए होगी. इस दौरान ऐसे वाहनों को आपातकालीन सेवा (emergency service) पर और आपदा प्रबंधन ड्यूटी पर माना जाएगा. इससे पहले केंद्र ने रविवार को महाराष्ट्र (Maharashtra), आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता और राज्य के अंदर तथा दूसरे राज्यों में ऑक्सीजन सिलेंडरों (Oxygen Cylinder) की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए. एक बयान में यह जानकारी दी गई.

इसमें कहा गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Central Health Minister) ने एक डिजिटल बैठक की जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, सचिव डीपीआईआईटी (DPIIT) और सचिव, औषध ने हिस्सा लिया. बैठक में सात राज्यों के स्वास्थ्य सचिव (Health Secretary) और उद्योग सचिव भी शामिल थे और इस दौरान सभी स्वास्थ्य केंद्रों (Health Centers) में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता तथा ऑक्सीजन सिलेंडरों की राज्य के अंदर और दूसरों राज्यों तक निर्बाध आपूर्ति (uninterrupted supply) सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा हुई.

ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिये बकाये का समय पर भुगतान करने पर जोर
केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी उन्हें संबोधित किया. स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों को परामर्श दिया गया कि वे स्वास्थ्य केंद्र वार/अस्पताल वार ऑक्सीजन के लेखे-जोखे का प्रबंधन करें और वहां खर्च होने पर फिर से ऑक्सीजन की अग्रिम आपूर्ति सुनिश्चित करें जिससे उनके स्टॉक में कमी होने की स्थिति न बने. उनसे यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया कि चिकित्सीय ऑक्सीजन की राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आवाजाही पर कोई रोक न लगाई जाए और शहरों के अंदर तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) टैंकरों के लिये “हरित गलियारों” का प्रावधान किया जाए.यह भी पढ़ें: दोबारा राज्यसभा के उपसभापति चुने गए NDA उम्मीदवार हरिवंश

बयान में कहा गया कि अस्पतालों और संस्थानों के उत्पादकों के साथ ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिये दीर्घकालिक अनुबंध होते हैं जिनका सम्मान किये जाने की जरूरत है. इसलिये राज्यों को ऑक्सीजन की मुक्त आवाजाही पर रोक नहीं लगानी चाहिए. इसमें ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिये उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के बकाये का समय पर भुगतान करने को लेकर भी जोर दिया गया. (भाषा के इनपुट सहित)





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