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यहां के 68 हजार किसानों ने लिया धान की फसल न लगाने का फैसला 


चंडीगढ़. हरियाणा में धान के क्षेत्र से हर साल लगभग 1.0 मीटर भू-जल स्तर (Ground water level) में गिरावट आ रही है. आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाने के लिए सरकार ने इस साल 1.00 लाख हैक्टेयर जमीन में धान की फसल (Paddy crop) न उगाने का लक्ष्य रखा था. अब तक 72 हजार हैक्टेयर में धान न लगाने का फैसला किसान ले चुके हैं. यह निर्णय करने वाले 68 हजार किसान हैं. अभी रजिस्ट्रेशन जारी है. सरकार को उम्मीद है कि एक लाख हैक्टेयर का लक्ष्य इस बार हासिल हो जाएगा.

इसी तरह 332 किसानों ने बोरवेल बनवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है. प्रदेश में भूजल रिचार्जिंग के लिए 1000 बोरवेलों का निर्माण होना है. रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक में सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा. एक बोरवेल पर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च आएगा. 90 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी और केवल 10 फीसदी रकम किसान को देनी होगी. बोरवेल बनाने के बाद इसे किसानों को सौंप दिया जाएगा.

‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ में क्या है

-मेरा पानी-मेरी विरासत योजना (Mera Pani Meri Virasat Scheme) के तहत जिन किसानों ने अपनी कुल जमीन के 50 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र पर धान की बजाय मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, सब्जियां इत्यादि फसल उगाई है उन्हें 7,000/- रूपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाएगा.

332 किसानों ने बोरवेल के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है

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-7,000/- रूपये प्रति एकड़ के अतिरिक्त जिन किसानों ने धान की बजाय फलदार पौधों तथा सब्जियों की खेती से फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाया है, उनको बागवानी विभाग द्वारा चलने वाली परियोजनाओं के प्रावधान के अनुसार अनुदान राशि अलग से दी जाएगी.

-इस योजना के तहत अपनाई गई फसल मक्का, बाजरा, दलहन के उत्पादन को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा.

-फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को सूक्ष्म सिंचाई संयत्र लगाने पर कुल लागत का केवल जीएसटी ही देना होगा.

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कहां लागू है ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’

प्रदेश के वो 8 ब्लॉक इसके लिए चयनित किए गए हैं जिनमें भूजल संकट ज्यादा है. इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा. इनमें धान की बिजाई होती है. इनमें किसानों को बागवानी अपनाने के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने का इंतजाम किया गया है. हालांकि, प्रदेश में ज्यादा जल संकट वाले 19 ब्लॉक हैं. लेकिन इनमें से 11 ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती.





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