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राघोपुर विधानसभा सीट: लालू-राबड़ी परिवार का गढ़ है ये सीट, तेजस्वी ने शुरू किया था सियासी सफर


वैशाली. हर बार की तरह बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) में भी एक सीट सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरेगी और वो है वैशाली (Vaishali) जिले की राघोपुर विधानसभा सीट (Raghopur Assembly Constituency). 90 के दशक के मध्य से 15 साल तक इस सीट पर लालू प्रसाद यादव-राबड़ी देवी का कब्जा रहा. 2010 में राबड़ी यहां से हार गईं लेकिन इस हार के बावजूद लालू प्रसाद यादव ने इसे अपने परिवार के लिए सुरक्षित सीट ही माना. यही कारण था कि 2015 में लालू प्रसाद यादव ने इस सीट से अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सफलता के साथ लांच भी कर दिया.

तेजस्वी में 2015 विधानसभा चुनाव से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. अपने पहले ही चुनाव में तेजस्वी ने बड़ी जीत हासिल की थी. उन्होंने 91,236 मतों के साथ बीजेपी के सतीश कुमार को 23 हजार से ज्यादा मात दी थी. उन्हें 68503 वोट मिले थे. 2015 से 2017 तक तेजस्वी बिहार के उपमुख्यमंत्री रहे. इसके बाद महागठबंधन सरकार गिरने के बाद वह नेता प्रतिपक्ष बने.

1995 से लालू परिवार का हिस्सा रही है सीट

दरअसल राघोपुर वर्ष 1995 में तब चर्चा में आया, जब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसे अपना क्षेत्र चुना. लालू को ये सीट 1980 से 1995 तक लगातार 3 बार से विधायक रहे समाजवादी उदय नारायण राय उर्फ भोला राय ने दी थी.लालू पहली बार 1995 में यहां जनता दल के टिकट पर 1995 में चुनाव जीते, हालांकि बाद में चारा घोटाले में लालू जेल चले गए. इसके बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं और राबड़ी ने 2010 तक इस इलाके का प्रतिनिधित्व किया.

सियासी गणित

20 साल में एक बार 2010 में जेडीयू ने यहां जीत का स्वाद चखा था. उस समय पार्टी से सतीश कुमार मैदान में थे, जिन्होंने राबड़ी देवी को हराकर राजद को बड़ा झटका दिया था. लेकिन इसके बाद 2015 में जेडीयू महागठबंधन में राजद के साथ हो गया और तेजस्वी को बड़ी जीत मिली. वैसे लोजपा और बीजेपी ने भी यहां से किस्मत आजमाई लेकिन सफलता किसी के हाथ नहीं लगी.

ताजा स्थिति ये है कि तेज प्रताप की तरह तेजस्वी के सीट बदलने के कयास नहीं लग रहे, यानि ज्यादा उम्मीद है कि वह अपना दूसरा विधानसभा चुनाव इसी सीट से लड़ेंगे. 2015 में जेडीयू उनके साथ था, इसलिए जीत को आसान माना गया लेकिन इस बार महागठबंधन टूट चुका है. और इस यादव बाहुल्य सीट पर एनडीए के तीन प्रमुख दल बीजेपी, लोजपा और जेडीयू एक साथ हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वे तेजस्वी को घेरने की क्या रणनीति बनाएंगे और ये सीट किस्से हिस्से जाएगी.

मतदाताओं की स्थिति

वैसे बिहार की सबसे सबसे हाईप्रोफाइल सीट होने के बाद भी राघोपुर विकास के मामले में बेहद पिछड़ा इलाका है. ये हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. राघोपुर में करीब 3,17,517 मतदाता हैं, जिनमें 1,73,476 पुरुष और 1,44.040 महिला मतदाता हैं.

चुनावी इतिहास

2015- राजद से तेजस्वी यादव ने बीजेपी के सतीश कुमार को हराया.

2010- जेडीयू से सतीश कुमार ने राजद से राबड़ी देवी को हराया.

अक्टूबर 2005- राजद से राबड़ी देवी ने सतीश कुमार को हराया

फरवरी 2005- राजद से राबड़ी देवी ने लोजपा से राजीव रंजन को हराया

2000 में राजद से लालू प्रसाद यादव ने जेडीयू के विश्वदेव राव को हराया

2000 उपचुनाव में राजद से राबड़ी देवी ने जेडीयू की वीणा देवी को हराया.

1995 में राजद से लालू प्रसाद यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार विष्णुदेव राय को हराया.

1990 में जनतादल के उदय नारायण राय ने निर्दलीय हरिहर प्रसाद सिंह को हराया.

इससे पहले उदय नारायण राय ने 1985 में लोकदल से और 1980 में जनता पार्टी (चरण सिंह) से जीत हासिल की. 1977 में जनता पार्टी और 1972 में एसओपी से सीट बाबूलाल शास्त्री ने जीती, उससे पहले उससे पहले ए मिश्रा (1972), रामवृक्ष राय (1969), बैद्यनाथ (1969),  एचएन सिंह (1967), ए गोयत (1967), देवेंद्र सिन्हा (1962), हरिवंश नारायण सिन्हा (1957 और 1951) जीते.





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