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सरकार ने 2018 में सेना को लेकर जो ​लिया था फैसला वहीं अब चीन के लिए बना मुसीबत


पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन की सेना के साथ हिंसक झड़प के बाद बॉर्डर सेना बढ़ा दी गई है.

India-China Faceoff: पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत (India) और चीन (China) के ​बीच हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. हिंसक झड़प के बाद सेना को बॉर्डर पर पूरी छूट दे दी गई है.

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत (India) और चीन (China) के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. दोनों ही देशों की सेनाएं गलवान घाटी पर डटी हुई हैं. रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीनों सेनाओं के प्रमुख और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के साथ बैठक में LAC पर तैनात सशस्त्र बलों को चीन के किसी भी आक्रामक बर्ताव का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी आजादी दे दी गई है. बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से साल 2018 में सेना को लेकर जो बड़े फैसले लिए गए थे वही अब चीन के लिए घातक साबित हो सकते हैं.

रक्षा मंत्रालय ने साल 2018 में सशस्‍त्र बलों को राजस्‍व प्रबंधन में फैसले लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जल, थल और वायु सेना के प्रमुखों के वित्तीय फैसला लेने की शक्तियां बढ़ाईं थीं. इस फैसले के बाद तीनों सेनाओं के प्रमुख अपनी मौजूदा वित्तीय शक्ति का पांच गुना अधिक यानी 500 करोड़ रुपये तक के फैसले ले सकते हैं. भारत और चीन के बीच जारी विवाद के दौरान अब सेना अपने इस बजट का पूरी तरह से इस्तेमाल कर रही है.

बता दें कि तीनों ही सेनाओं की ताकत बढ़ाने के लिए 8 नवंबर 2018 को तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले को मंज़ूरी दी थी. रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने यह फैसला सशस्‍त्र बलों के लिए हथियार और युद्ध सामग्री बढ़ाने के लिए लिया था, ताकि सेना की संचालन तैयारी को तेज किया जा सके.

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सूत्रों ने कहा कि गलवान घाटी की घटना के बाद भारतीय सैनिक टकराव की हालत में अग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी समय से चली आ रही परंपरा को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे. सशस्त्र बलों को चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है. सीमा प्रबंधन पर 1996 और 2005 में हुए दो समझौतों के अनुरूप दोनों देशों की सेनाओं ने टकराव की स्थिति में आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल न करने का पारस्परिक निर्णय किया था.

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लड़ाकू विमान देश की रक्षा में किए गए तैनात

भारतीय वायुसेना ने पिछले पांच दिन में लेह और श्रीनगर सहित वायुसेना के अहम अड्डों पर सुखोई 30 एमकेआई, जगुआर, मिराज 2000 विमान और अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर तैनात कर दिए हैं. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने शनिवार को कहा था कि भारतीय वायुसेना चीन के साथ लगती सीमा पर किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उपयुक्त जगह पर तैनात है. उन्होंने यहां तक संकेत दिए थे कि कड़ी तैयारियों के तहत उनके बल ने लद्दाख क्षेत्र में लड़ाकू हवाई गश्त की है.


First published: June 22, 2020, 7:10 AM IST





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