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सियासी मुद्दा बन चुकी पराली प्रबंधन की तैयारियां शुरू, हरियाणा ने पास की 1,305 करोड़ रुपये की योजना


चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने राज्य में पराली प्रबंधन के लिए 1,304.95 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की है. इसका मकसद राज्य में फसल अवशेषों को जलाने (Stubble burning) से रोकना है. हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले सूबों में शामिल हैं. क्योंकि यहां धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है और उसकी मशीनों से कटाई होती है. चूंकि प्रदूषण की वजह से पराली एक सियासी मुद्दा भी बन चुका है, इसलिए सीएम मनोहर लाल ने धान कटाई से काफी पहले ही इसके प्रबंधन के लिए काम शुरू कर दिया है.

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन’ योजना के तहत केंद्र सरकार को 639.10 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना प्रस्तुत की है.

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कौशल ने बताया कि राज्य सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण वितरित करने, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) बनाने एवं कंट्रोल रूम बनाने सहित पुआल के प्रबंधन के लिए हरसंभव उपाय कर रही है.

पराली को न जलाने देने के लिए खट्टर सरकार ने कसी कमर  (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गैर-बासमती उत्पादकों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सात दिनों के भीतर 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है. इसके लिए 1,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से छोटे और सीमांत किसानों की मदद भी की है. इन दोनों उद्देश्यों के लिए सरकार ने बजट में पहले ही 453 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

कौशल ने बताया कि सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए स्ट्रा बेलर इकाइयों की स्थापना को भी प्रोत्साहित कर रही है. इसके तहत 5 नवंबर, 2019 तक 64 ऐसी इकाइयां जबकि 6 नवंबर से 11 दिसंबर के बीच 131 इकाइयां स्थापित की गईं.

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पिछले सीजन में क्या हुई कार्रवाई: पराली जलाने वालों और इन घटनाओं को नियंत्रित करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान है. इसमें पिछले साल 2,020 एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई गईं. सात अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और 23 अधिकारी चार्जशीट हुए हैं. ग्राम स्तर के 499 नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. ऐसी घटनाओं की सूचना देने वाले लोगों को 1000-1000 रुपये का नकद इनाम भी दिया गया है.

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पराली प्रबंधन करने वाली एक मशीन (File Photo)

क्या फायदा मिला: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के आंकड़ों के अनुसार, इन प्रयासों के चलते वर्ष 2018 की तुलना में आग की घटनाओं वाले वास्तविक स्थानों में 68.12 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है. 6 से 30 नवंबर, 2018 के बीच राज्य में आग की घटनाओं वाले 4,122 स्थान पाए गए थे, जबकि वर्ष 2019 में इसी अवधि के दौरान ऐसे केवल 1,314 पाए गए थे.





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