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2 वर्ल्‍ड कप जीत का हिस्‍सा रहे भारतीय क्रिकेटर का खुलासा,कहा- लाइट बंद करने में भी लगता था डर, करना चाहता था सुसाइड


एस श्रीसंत ने कहा कि उनके मन में भी आत्‍महत्‍या करने का विचार आया था फाइल फोटो

इस गेंदबाज ने कहा कि एक समय उन्‍हें लाइट बंद करने और भतीजों के कॉलेज जाने से भी डर लगता था

नई दिल्‍ली. बॉलीवुड एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्‍महत्‍या के बाद एक बार फिर डिप्रेशन जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा होने लगी है. कहा जा रहा है कि सुशांत पिछले काफी समय से डिप्रेशन में थे. डिप्रेशन के मुद्दे पर टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बात करते हुए टीम इंडिया को दो वर्ल्‍ड कप दिलाने में अहम भूमिका वाले भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ( S Sreesanth) ने कहा कि उनकी जिंदगी में भी एक पल ऐसा आया था, जब उनके मन में भी आत्‍महत्‍या करने का विचार आने लगा था. यहां तक कि लाइट बंद करने में भी डर लगता था. मगर परिवार की मदद से और खुद को साबित करने की जिद ने उन्‍हें ऐसा खौफनाक कदम उठाने से रोक लिया.

श्रीसंत ने कहा कि जब आप खुश होते हैं खुद से बात अहम होती है. भारतीय गेंदबाज ने कहा कि खुद पर विश्‍वास सबसे ज्‍यादा अहम होता है. बहुत सारे लोग दोस्‍त और परिवार होने के बारे में लिखते हैं. उन्‍होंने कहा कि यह सही है कि साथ में कोई होना चाहिए, मगर आपका जो सबसे बड़ा दोस्‍त होता है, वो है अकेलापन. जब आप अकेले होते हैं, तो आप कई सारी चीजों की हकीक‍त में योजना बना सकते हैं. मगर बहुत लोग डिप्रेशन के साथ अकेलेपन को गलत बताते हैं. यह सिर्फ मानसिकता है. इस लॉकडाउन के दौरान यह साबित हुआ है कि कोई एक जगह पर 24 घंटे तक रह सकता है.

श्रीसंत ने कहा कि मैं बहुत भाग्‍यशाली हूं कि मेरी मानसिकता एक पॉइंट पर केन्द्रित थी. मुझे खुद को साबित करना था और सिर्फ मैं सच्‍चाई जानता था. मुझे अन्‍य लोगों को सच्‍चाई समझाने की जरूरत थी. इसे एक बार फिर साबित करने में मुझे सात साल का लंबा समय लगा.

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आत्‍महत्‍या का आया विचार
श्रीसंत ने कहा कि मुझे यह कहने में बिल्‍कुल भी शर्म नहीं है कि मेरी जिंदगी में भी एक समय ऐसा आया था, जब आत्‍महत्‍या का विचार आया, मगर मैंने मेरी जिंदगी की सकारात्‍मक चीजों की तरफ देखा. मैं इसे डार्क फेस नहीं कहूंगा, मगर यह तिहार जेल में रहने से भी बदतर था. एक ऐसा भी समय आया था जब मुझे लाइट बंद करने में भी डर लगता था. यहां तक कि अपने भांजे या भतीजे को कॉलेज के लिए बाहर जाने से भी डरता था और उन्‍हें सिर्फ एक चीज ने इस सब चीजों से बाहर निकाला. श्रीसंत ने कहा कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि जब मेरी बेटी या बेटा गूगल पर मेरा नाम सर्च करें तो मेरे बारे में अच्‍छी चीजें लिखी हुई आनी चाहिए.


First published: June 21, 2020, 3:25 PM IST





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