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2020 में 3.1 फीसदी लुढ़केगी भारत की GDP, भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ेगा जोखिम: Moody’s


Moody’s ने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रिपोर्ट जारी कर दी है.

Moody’s ने सोमवार को ग्लोबल मैक्रो आउटलुक को जारी कर दिया है. इसके मुताबिक, 2020 में भारतीय GDP में 3.1 फीसदी संकुचन रहेगा. हालांकि, अगले साल भारत के लिए बेहतर ​ग्रोथ का भी अनुमान है.

नई​ दिल्ली. फाइनेंशियल सर्विस कंपनी मूडीज (Moody’s) ने कहा है कि इस साल भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 3.1 फीसदी की संकुचन होगी. मूडीज ने सोमवार को ग्लोबल मैक्रो आउटलुक (Global Macro Outlook) रिपोर्ट में यह कहा है. मूडीज ने अपने इस रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था (Recovery in Global Economy) में जीवंत होने के संकेत दे रही है, लेकिन यह रिकवरी लंबा और कठिन होगा.

मूडीज ने इस रिपोर्ट में कहा है कि लॉकडाउन का असर पहले के अनुमान के मुकाबले ज्यादा होगा. वैश्विक अर्थव्यवस्था दूसरे विश्व युद्ध के बाद 2020 की दूसरी तिमाही सबसे खराब तिमाही साबित होगी.

अगले साल बेहतर जीडीपी की उम्मीद
भारत के लिए मामूली राहत की बात ये है कि 2021 में जीडीपी बाउसंबैक 6.9 के स्तर पर पहुंच जाएगी. तब तक भारतीय अर्थव्यवस्था में धीमी रिकवरी होगी. यह ही इस साल की दूसरी छमाही से शुरू होगी. बड़े स्तर पर देखें तो इस रिपोर्ट में 2020 के लिए जी20 देशों की अर्थव्यवस्था को लेकर कहा गया है कि इनमें 4.6 फीसदी का संकुचन देखा जाएगा. लेकिन, 2021 में ये अर्थव्यवस्थाएं 5.2 फीसदी की दर से आगे बढ़ेंगी.यह भी पढ़ें: चीन को चौतरफा घेरने के लिए भारत का नया प्लान! इन चीनी सामानों पर लगेगी रोक

भू-राजनीतिक तनाव के असर को नकार नहीं सकते
हालांकि, इस बात का भी अंदेशा जताया गया है कि भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भू​-राजनीतिक तनाव (Geo-Political Tension) भी यह तय करेगा मौजूदा ग्रोथ अनुमान कितना सटीक साबित होता है.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘भू-राजनीतिक तनाव का असर एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ने की संभावना है. दक्षिण चीन सागर से पड़ोसी देशों से चीन की झड़प और भारत के साथ भू​-राजनीतिक जोखिम इस पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा.’

मूडीज ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि कोविड-19 संकट ने अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड व टेक्नोलॉजी को लेकर तनाव को बढ़ा दिया है. पहले चरण का ट्रेड डील अभी भी जोखिम में है.

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चीन व अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता बरकरार
कहा गया है कि नवंबर में अमेरिकी चुनाव के बाद ट्रेड व टेक्नोलॉजी को लेकर दोनों देशों में असहमति बढ़ सकती है. अगर पहला चरण सफल भी रहता है तो भी दूसरे चरण को लेकर अनिश्चितता बरकरार रहेगी. ट्रेड, सप्लाई चेन्स, टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव अभी भी जारी है और वैश्विक व्यापार के लिए यह महंगा साबित हो सकता है.


First published: June 22, 2020, 10:35 PM IST





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