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Father’s Day पर इमोशनल हुए माइक्रोसॉफ्ट CEO सत्या नडेला, पिता के लिए लिखा ये पोस्ट


नई दिल्ली. आज फादर्स डे (Father’s Day) पर माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला (Satya Nadella) ने अपने पिता को याद करते हुए कई बातें साझा की. अपने पिता से जुड़ी पुरानी यादें ताज़ा करते हुए नडेला ने कहा कि मुझे याद है की मेरे पिता मध्यरात्रि में अपने बिस्तर पर बैठकर मोटी किताब पढ़ा करते थे. सत्या नडेला के पिता का नाम बी एन युंगधर है और वो 1962 बैच के IAS अधिकारी थे. 82 साल की उम्र में बीमारी की वजह से हैदराबाद में उनके पिता का देहांत हो गया था. रविवार को फादर्स डे पर नडेला ने अपनी पिता के बारे में लिंक्डइन पर एक पोस्ट लिखा है. उन्होंने इस पोस्ट में बताया कि कैसे उनके पिता एक इंस्टीट्यूशन बिल्डर थे.

इस पोस्ट में नडेला ने लिखा, ‘मेरे पिता का काम उनके लिए महज नौकरी से ज्यादा था. जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उनकी उम्र के 10 वर्ष की थी और इसके करीब 12 साल बाद उन्होंने भारतीय प्राशसनिक सेवा यानी IAS ज्वाइन किया.’

पीएमओ में अधिकारी रह चुके हैं उनके पिता
युगंधर पी वी नरसिम्हा राव (P V Narsimha Rao) के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO- Prime Minister’s Office)  में भी काम किया है. बाद में उन्होंने मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडेमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के निदेशक के तौर पर काम किया.यह भी पढ़ें: खुशखबरी: भारतीय कंपनी ने बना ली कोरोना की दवा, 103 रुपये प्रति टैबलेट है कीमत

जुनून के साथ राष्ट्र निर्माण में लगे थे उनके पिता
इस इमोशनल नोट में सत्या नडेला ने लिखा, ‘यह उनके लिए एक प्रोफेशनल ​करियर च्वाइस नहीं था बल्कि एक कॉलिंग थी जो उनके मन की थी. उस वक्त माहौल में राष्ट्र​​ निर्माण को लेकर जोश था. उन्होंने पूरे जुनून के साथ खुदको इसमें झोंक दिया था और जीवनभर इसके लिए प्रतिबद्ध रहे.’

सत्य नडेला ने आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, तिरुपति में स्कूली पढ़ाई की थी. इसके बाद मसूरी, दिल्ली और हैदराबाद में भी उन्होंने पढ़ाई की. बाद में IIT प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद वो अमेरिका चले गए. माइक्रोसॉफ्ट सीईओ ने कहा कि जिस प्रकार मेरे पिता ने अपने काम और जुनून को एक साथ जोड़ा इससे मुझे बहुत प्ररेणा मिली. इसी से काम और जीवन को लेकर मेरे विचार ने नया आकार लिया.

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अपने पिता से सीखीं ये बातें
उनके पिता कहते थे कि जब आप किसी असाइनमेंट को पूरा करने के आगे बढ़ जाते हो तभी इसका सबसे उत्तम प्रभाव देखने को मिलता है. नडेला ने जोर देते हुए कहा, ‘आज जिन लोगों को मेंटर करते हो, सशक्त बनाते और उनमें जो संस्कृति बनाते हो, उसी का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है. उन्हें वो लोग पसंद नहीं जिन्हें यह समझ नहीं होती कि क्या बदलाव करना है और वास्तविक दृष्टिकोण क्या है और इसके बावजूद वो किसी असाइनमेंट में हस्तक्षेप करत हैं.’

अपनी पॉपुलर किताब Hit Refresh में नडेला ने लिखा है, ‘मेरे पिता मार्क्सवाद की तरफ झुकाव रखने वाले सिविल सर्वेन्ट थे और मेरी मां एक संस्कृत स्कॉलर थीं. मैनें अपने पिता से इंटेलेक्चुअल स्तर पर बहुत कुछ सीखा है लेकिन हमेशा अपनी मां का ही बेटा रहा.’

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उनके पिता हमेशा कहते थे कि लाइफ का एक टर्मिनल प्वाइंट होता है और कोई भी हमेशा के लिए जीवित नहीं रहता है. लेकिन कोई यह बता जाए कि मनुष्य होना क्या है और जीवित रहना क्या है तो वो हमेशा के लिए अमर रहते हैं. मैं खुद विभिन्न समय और परिदृश्य में काम करता हूं और जीता हूं. लेकिन इसके बाद भी मुझे मेरे पिता द्वारा दिए गए पाठ से ही गाइडेंस मिलती है. इसी से मैं अपने जुनून और सिद्धांत को पूरा करता हूं.





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