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India-China Standoff: सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया- LAC पर बौखलाया है चीन?


राठौड़ ने फेसबुक लाइव के माध्यम से चीन को लेकर अहम जानकारी दी

भारत (India) को लेकर चीन (China) का रुख कैसे बदल गया और वह क्यों भारत की राह में रोड़े अटकाने का प्रयास करने लगा इसे लेकर सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने बुधवार को कई अहम जानकारियां दीं.

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में भारत और चीन के बीच तनातनी जारी है. हालांकि दोनों देश अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे करने के लिए राजी हो गए हैं लेकिन भारत (India) को लेकर चीन (China) का रुख कैसे बदल गया और वह क्यों भारत की राह में रोड़े अटकाने का प्रयास करने लगा इसे लेकर सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) ने बुधवार को कई अहम जानकारियां दीं. एक फेसबुक लाइव (Facebook Live) में राठौड़ ने भारत-चीन तनातनी (India China Standoff) को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं. राठौड़ ने कहा कि इस तनातनी के पीछे चीन का पहला लक्ष्य था भारत के बुनियादी विकास पर रोक लगाना. उन्होंने कहा कि चीन पहले डरा धमकाकर ये काम कर भी लेता था लेकिन आज भारत वह भारत नहीं रह गया जहां डरा धमकाकर काम कराया जा सके. देश में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार है ऐसे में चीन के मंसूबे कामयाब नहीं हो सके.

राठौड़ ने आगे बताया कि चीन का दूसरा लक्ष्य भारत को दक्षिणी एशिया (South Asia) तक सीमित कर देना है. अभी भारत का परचम पूरी दुनिया में फैल रहा है ऐसे में चीन भारत को सीमित करने के उद्देश्य से भी काम कर रहा है. राठौड़ ने बताया कि तीसरे लक्ष्य के तौर पर वह भारत की स्थिति को कमजोर करने में लगा हुआ है. राठौड़ ने बताया कि जापान (Japan) ने पहल करते हुए चार लोकतांत्रिक देशों के एक समूह के बीच वार्ताएं शुरू कीं जिसमें कि भारत, अमेरिका (America), जापान और ऑस्ट्रेलिया (Australia) शामिल हैं. राठौड़ ने बताया कि ये चारों देश लोकतांत्रिक भी हैं और ये समुद्र के साथ भी हैं. अब चीन अपनी सीमाओं के विस्तार में लगा है तो उससे ये देश प्रभावित हो रहे हैं. इस चतुर्पक्षीय वार्ता का लक्ष्य चीन को अलग-थलग करना नहीं बल्कि उसे साथ जोड़ना था. सांसद ने कहा कि बहुत सारे ऐसे मुद्दे हैं जहां ये चारों देश मिलकर आपस में एक दूसरे की मदद कर सकते हैं जिसे लेकर चीन असुरक्षित महसूस करने लगा. इसके साथ ही वह इस चर्तुपक्षीय वार्ता में भारत की स्थिति को कमजोर करने पर भी लगा हुआ है.

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दूसरे देशों की राहों में रोड़े अटकाता है चीनराठौड़ ने बताया कि चीन लगातार अपनी सीमाओं का विस्तार करने में लगा है. वह पहले ही तिब्बत (Tibet) पर कब्जा कर चुका है, वह प्राचीन समय की तरह सिल्क रोड बनाना चाहता है. चीन इंग्लैंड तक रेल चलाने पर भी विचार कर रहा है. इसके साथ ही साथ वह पाकिस्तान में भी बेल्ट रोड इनीशिएटिव पर काम कर रहा है लेकिन यदि कोई और देश अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में सोचता है तो चीन उसमें अड़ंगे लगाता है.

गौरतलब है कि भारत और चीन बीच 5 मई से लद्दाख में तनातनी बनी हुई है. लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में 15-16 जून की दरम्यानी रात दोनों देशों के बीच की ये तनातनी हिंसक झड़प में बदल गई जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए. चीन को भी इस हाथापाई में अच्छा खासा नुकसान पहुंचा. तनातनी शुरू होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की कई वार्ताएं भी हुईं. जिसके बाद दोनों देश अपनी सेनाओं को पीछे करने को राजी हो गए हैं. बता दें सीमा पर ये 45 साल में अब तक की सबसे बड़ी हिंसा की घटना रही.


First published: June 24, 2020, 4:05 PM IST





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