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RIC बैठक में विदेश मंत्री का ड्रैगन पर निशाना, रूस ने कहा-भारत चीन को बाहरी मदद की जरूरत नहीं


RIC बैठक में विदेश मंत्री ने चीन पर साधा निशाना (File Photo)

लद्दाख (Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan) में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प (India-China Faceoff) में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) की मौजूदगी में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (EAM S Jaishankar) ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं.

नई दिल्ली. भारत और चीन (India-China) के बीच लद्दाख (Ladakh) में जारी तनातनी के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने मंगलवार को रूस-भारत-चीन (Russia-India-China) की एक त्रिपक्षीय वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया. इस बैठक में विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय सेट-अप और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नैतिकता में भागीदारों के उचित हितों को पहचानने की आवश्यकता को रेखांकित किया. हाल ही में लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan) में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद भारतीय विदेश मंत्री ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मौजूदगी में यह टिप्पणी की. पिछले हफ्ते, भारत ने चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों की हत्या को “पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई” करार दिया था.

जयशंकर ने कहा, “यह विशेष बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के समय-परीक्षण के सिद्धांतों में हमारे विश्वास को दोहराती है. लेकिन आज चुनौती केवल अवधारणाओं और मानदंडों में से एक नहीं है, बल्कि उनके व्यवहार को लेकर भी है.” उन्होंने कहा, “दुनिया की अग्रणी आवाजों को हर तरह से अनुकरणीय होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना, साझेदारों के वैध हितों को पहचानना, बहुपक्षवाद का समर्थन करना और दोनों को हितों को बढ़ावा देना एक टिकाऊ विश्व व्यवस्था के निर्माण का एकमात्र तरीका है.” विदेश मंत्री की टिप्पणियों को चीन के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में देखा जाता है जो हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने के अलावा भारत के साथ अपनी भूमि सीमा पर आक्रामक मुद्रा अपना रहा है.

75 सालों से भारत के साथ होता रहा अन्याय
अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में, जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक आदेश के बाद द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) में इसकी यथोचित मान्यता नहीं मिली और यह कि पिछले 75 वर्षों से ऐतिहासिक अन्याय “बिना सोचे समझे” बना रहा. उन्होंने कहा, “जब विजेता वैश्विक व्यवस्था को पूरा करने के लिए मिले, तो उस युग की राजनीतिक परिस्थितियों ने भारत को उचित मान्यता नहीं दी. यह ऐतिहासिक अन्याय पिछले 75 वर्षों से बिना बदलाव के चलता रहा है, यहां तक कि दुनिया भी बदल गई है.” उन्होंने कहा, ”दुनिया के लिए यह महत्वपूर्ण था कि भारत द्वारा किए गए योगदान और अतीत को सुधारने की आवश्यकता दोनों को महसूस किया जाए.”ये भी पढ़ें :- जल्द ATM से सिर्फ 5000 रुपए निकालने की सीमा हो सकती है तय, जानिए क्यों?

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता के बारे में भी बताया ताकि वह विश्व की वर्तमान वास्तविकता का प्रतिनिधित्व कर सके. जयशंकर ने कहा, “लेकिन इतिहास से परे, अंतरराष्ट्रीय मामलों को भी समकालीन वास्तविकता के साथ आना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) 50 सदस्यों के साथ शुरू किया था, आज इसमें 193 सदस्य हैं. निश्चित रूप से, इसका निर्णय इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता है.” जयशंकर ने कहा, “हम, आरआईसी देशों, वैश्विक एजेंडा को आकार देने में सक्रिय भागीदार रहे हैं. यह भारत की आशा है कि हम अब सुधारवादी बहुपक्षवाद के मूल्य पर भी एक साथ रहेंगे.”

रूस ने कहा, भारत-चीन आपस में सुलझा लेंगे मुद्दा
वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्जेयी लावरोव (Sergei Lavrov) ने इस बैठक में कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत और चीन को किसी भी बाहरी मदद की जरूरत है. मुझे नहीं लगता कि खासकर जब देश के मुद्दों को लेकर कोई बात हो तो उनकी मदद की जानी चाहिए. हाल ही में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वह इसे आपस में सुलझा लेंगे.

रूस के विदेश मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली-बीजिंग ने शांतिपूर्ण इस मसले को हल करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है. उन्होंने सैन्य अधिकारियों, विदेश मंत्रियों के स्तर पर वार्ताएं शुरू की हैं और दोनों ही पक्षों में से किसी ने भी ऐसा कोई बयान दिया है जिससे संकेत मिले कि दोनों में से कोई भी गैर राजनयिक संबंध को बढ़ाना चाहता है. लावरोव ने आगे कहा कि हम आशा करते हैं कि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहेगी और दोनों देश विवादों के शांतिपूर्ण हल के लिए प्रतिबद्धता दिखाते रहेंगे.

भारत गलवान घाटी की झड़प के बाद रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए अनिच्छुक था लेकिन सम्मेलन के मेजबान मॉस्को के अनुरोध के बाद भारत ने इसमें भाग लेने के लिए सहमति व्यक्त की.


First published: June 23, 2020, 4:21 PM IST





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